…और लोग रोने लगे तालियां बजाते हुए

Rajesh Khanna

राज बहादुर सिंह

: राजेश खन्ना की पुण्य तिथि 18 जुलाई पर श्रद्धांजलि : वक्त के पंख होते हैं और उसे किसी ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना नहीं होता है और शायद यही वजह है कि झटका चाहे जितना बड़ा हो वह और जोरदार झटके से आगे बढ़ता जाता है। आज काका को इस दुनिया से गए छह साल हो गए हैं लेकिन आज भी मुम्बई की सड़कों पर उन्हें विदा करने के लिए उमड़ा हुजूम आंखों के सामने तैरता है।

जहां तक राजेश खन्ना का सवाल है तो मैं कभी उनका दीवाना नहीं रहा। शायद उनके लिए सारी दीवानगी लड़कियों के हिस्से चली गयी थी। बहरहाल उनकी कई फिल्मों के गाने मुझे खूब पसंद थे जिनमें आराधना, दो रास्ते, सफर, आनंद या कुछ दीगर फिल्में शामिल थीं। काका ने 1969 से 1972 के बीच तूफान मचा कर रख दिया था। लगातार एक दर्जन से ज्यादा हिट फिल्में दीं।

और जब यह तूफान उतरा तो दोबारा इसकी लहरें वो ऊचाईंयां न छू सकी हालांकि बीच बीच मे उन्होंने जोर जरूर मारा और बढ़िया जोर मारा। काका ने अपने कैरियर के टॉप पर बॉबी (डिम्पल) से शादी की लेकिन इसके बाद उनका कैरियर उतरने लगा। अमिताभ बच्चन की एंट्री हो चुकी थी और लोगों को रोमांटिक आशिक के बजाय समाज की दुश्वारियों से जूझता हुआ एंग्री यंग मैन भाने लगा था।

लेकिन काका को यह हकीकत कभी नहीं भायी। वह कभी इसे आत्मसात नहीं कर सके। कुछ सालोँ बाद उन्होंने वापसी की।  कुदरत, थोड़ी सी बेवफाई, रेड रोज, धनवान, सौतन और अवतार जैसी फिल्में कीं और ये बेहतरीन फिल्में थीं लेकिन काका का बेहतरीन समय गुजर चुका था। हालांकि सौतन और अवतार बॉक्स आफिस पर भी कामयाब थीं। अवतार में उनकी एक्टिंग मेरी नजर में किसी भी फ़िल्म में उनका सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस था।

काका ने सियासत में भी भाग्य आजमाया। नई दिल्ली सीट पर वह भाजपा के दिग्गज एलके आडवाणी से कुछ सौ वोटों से हारे लेकिन फिर ऊपचुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा को हराकर लोक सभा पहुंचे। बहरहाल वह सियासत की व्यवहारिक जरूरतों और जिम्मेदारियों से तालमेल नहीं बैठा सके और इससे अलग हो गए या यूं कहें तौबा कर ली।

कोई हमेशा उरूज पर नहीं रहता और यही कुदरत का दस्तूर है लेकिन राजेश खन्ना ने जिन बुलंदियों को छुआ उन पर उन्हें कुछ अरसा और ठहरना चाहिए था। बहरहाल ऐसा हुआ नहीं और इसका अफसोस उनके बेशुमार चाहने वालों को हमेशा रहेगा। उनके साथ एक दौर में आज की परिभाषा में लिविंग इन रिलेशनशिप में रहीं टीना मुनीम के इन लफ्जों से उनके लिए दीवानगी का अंदाजा लगाया जा सकता है-

Me and Kaka share same tooth brush.

खैर केवल 70 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए काका को श्रद्धांजलि के साथ अर्पित-

कहानी खत्म हुई और ऐसे खत्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियां बजाते हुए।

rbsराज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.