IPL : खेल-मनोरंजन की आड़ में सट्टे का रोमांच!

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  • दुबई का डिब्‍बा बोलता है, जिस पर दाऊद का आधिपत्‍य है
  • युवा पीढ़ी सट्टेबाजी की चपेट में हो रही बरबाद

दिल्‍ली : आखिरकार कोरोना के इतने बड़े संकटकाल में भी कुछ भद्रजनों के अथक प्रयासों से आईपीएल होने जा रहा है. कभी-कभी तो संदेह हो रहा था कि कोरोना बड़ी समस्या है या आईपीएल का समय पर आयोजित ना हो पाना बड़ी समस्या है. चलिए एक का समाधान तो हो गया है बस अब कोरोना की वैक्सीन और आ जाये तो अगले साल होने वाले आईपीएल को भी देखने की तमन्ना को भी पंख लग जायेंगे.

इस बार ये देश में ना होकर विदेश में हो रहा है. पहले भी आईपीएल अन्य कारणों से विदेशों में हो चुका है तो क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह नई बात नहीं है. हां, लेकिन जिन आईपीएल टीमों के कोचों, कप्तानों, टीम मालिकों ने भारत की परिस्थितियां, पिचें, मैदान देखकर अपनी रणनीति बनाई थी, टीम संयोजन बनाया था, उनके लिये यह जरूर जोर का झटका है, लेकिन उम्मीद है कि टीमें इसके अन्य विकल्प तलाशकर आसानी से आगे बढ़ जायेंगी.

उम्मीद है कि देश कुछ दिनों के लिए कोरोना की चपेट से दूर होकर आईपीएल के आगोश में आ जायेगा. कुछ दिनों के लिए कोरोना के बुखार पर, आईपीएल की खुमारी भारी पड़ जायेगा. इस बार आईपीएल बिना दर्शकों के होगा, जिसका कभी कुछ टीमों को फायदा और कभी कुछ टीमों को नुकसान भी होगा. आईपीएल 2020 से पहले भी कई अंतराष्ट्रीय मैच और कई क्रिकेट लीग खाली स्टेडियम में, बिना दर्शकों के सफलतापूर्वक आयोजित हो चुकी है तो ये चिंता भी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर ही है.

वैसे भी, जो दर्शक स्टेडियम में जाकर मैच का आंनद लेते अब वो घर बैठे बैठे मैच का लुफ्त उठायेंगे. दर्शकों की संख्या भी पिछली बार से बढ़ने की उम्मीदें हैं. वैसे भी कहते हैं ना सब्र का फल मीठा होता है और क्रिकेट प्रेमियों ने लगभग 5 महीनों का सब्र किया है तो इस फल को तो वो बिना मजे लिए छोड़ने वाले नहीं.

आईपीएल शुरू होने से दर्शकों को, क्रिकेट प्रेमियों को भरपूर मनोरंजन और रोमांच तो मिलेगा ही और साथ ही में अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को एक बार फिर मैदान पर जीत के लिए एक दूसरे से लड़ने का जज्बा दिखाते हुए देखने का मौका भी मिलेगा.

आईपीएल के रोमांच, मनोरंजन व फायदों के बारे में और भी सकारात्मक, न्यूज चैनलों, अखबारों में लगातार आपको मिलेगा और पहले भी मिलता रहा है, लेकिन मैं इसके कुछ नकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालने जा रहा हू, जिसे जानकार आप भी चौंक जायेंगे.

किसी भी देश की जान, उस देश की युवा पीढ़ी होती है और मुझे बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे देश की युवा पीढ़ी के लिए नशेबाजी के बाद सट्टेबाजी सबसे बड़ा अभिशाप बनता जा रहा है. देश की जनता का एक हिस्सा विशेषरूप से युवा पीढ़ी आईपीएल में लगने वाले सट्टे में पड़कर बर्बाद होती जा रही है, जो कि हमारे देश के लिए बड़ा ही विध्वंसकारी है.

मेरे लिखे इस लेख से अगर एक भी युवा या कोई अन्‍य व्यक्ति इस दलदल से बाहर आया तो मैं समझूंगा मेरा इस लेख को लिखना सार्थक हो गया. आईपीएल में लगने वाले सट्टे ने हर बड़े, छोटे शहरों, गांवों में अपने पैर पसार लिया है. पुलिस प्रशासन के लिए यह हफ्ता वसूली का एक नया अवैध व्यवसाय मात्र है.

वैसे भी आईपीएल के शुरू होने से पहले ही, हर छोटे-बड़े शहर-गांव में सट्टा (मटका) होता ही है. सूत्र बताते हैं कि हर जगह पुलिस का यहां से हफ्ता बंधा हुआ होता है, और कहीं कहीं इसकी जानकरी उच्च अधिकारियों तक भी होती है. इसके चलते बिना किसी के डर के शहरों के तमाम मोहल्लों में खुलेआम सट्टे (मटका) का अवैध धंधा होता है. इससे गरीब तबका अपनी मेहनत की कमाई इन सट्टेघरों में हार जाता है.

आईपीएल या क्रिकेट मैच में लगने वाले सट्टे के विपरीत यहां हर वर्ग का व्यक्ति सट्टा लगाता है. हां, आईपीएल की तुलना में सट्टा (मटका) में सट्टा लगाने वाला तबका अधिकतर निम्न वर्ग ही होता है. हां, यहां पर जीत का लालच भी क्रिकेट मैच में लगने वाले सट्टे की तुलना में बहुत बड़ा होता है. आईपीएल या अन्य क्रिकेट मैच में लगने वाले सट्टे को पुलिस से रोकने की उम्मीद क्या करें, जब पुलिस की सहायता से ही सट्टा (मटका) एक अवैध व्यवसाय ही बन गया है. जमकर दूध देने वाला व्यवसाय!

क्रिकेट में सट्टा लगाने वाले को पंटर, सट्टा खिलवाने वाले को बुकी कहा जाता है. कहीं कहीं बीच में कमीशनखोर भी होते हैं, जो कि पंटरों और सट्टेबाजों को जोड़ने की कड़ी होते हैं. बुकी, पंटरों को एक फोन नंबर देता है और पंटर इसी पर फोन करके सट्टा लगाता है. गौरतलब है कि हर सट्टेबाज के पास एक डिब्बा होता है.

सूत्र बताते है कि ये डिब्बा सीधे दुबई से बोलता है और इस पर भारत के परम दुश्मन दाऊद का अधिपत्य होता है. भारत में क्रिकेट में लगने वाले सट्टे से प्रत्यक्षरूप से भारत के सबसे बड़े दुश्मन दाऊद इब्राहिम को फायदा पहुंचता है, फिर भी सरकार या पुलिस प्रशासन ने इस पर आंख मूंद रखा है, यह बहुत ही शर्मनाक स्थिति है.

क्रिकेट मैच में सट्टा, दो तरह से लगाया जाता है. इसमें टीमों की हार जीत और कुछ विशेष ओवरों में बनने वाले रनों पर सट्टा लगाया जाता है. आईपीएल में ये सट्टेबाजी अपने चरम पर होती है. कई आईपीएल खिलाड़ियों पर कई बार मैच फिक्सिंग के आरोप लगते रहे हैं और कई मैचों को देखकर ऐसा लगता भी है कि मैच फिक्सिंग और आईपीएल एक दूसरे से अंजान नहीं हैं.

आईपीएल में 20 ओवर का मैच होता है. यहां टीमों की हार जीत पर सट्टा लगता है. टीमों की मैच में स्थिति के हिसाब से टीमों पर भाव घटता बढ़ता जाता है और 6 ओवर, 10 ओवर, 15 ओवर, 20 ओवर, जिसे सट्टेबाजी की भाषा में लंबी कहते हैं, पर सेशन खेला जाता है. इस पर पंटर, सट्टेबाजों के दिये नंबर पर फोन करके सेशन में दिये गये रनों को यस या नॉट करता है. कहीं कहीं दूसरी पारी के 6 ओवरों पर भी सेशन आता है.

दुबई से जो डिब्बा बोलता है वो टीवी पर आ रहे मैच से दो गेंद आगे या कम से कम एक गेंद आगे तो होता ही है. तो आप समझ सकते हैं इस खेल की निर्दयता को. वैसे भी क्रिकेट में लगने वाला सट्टा भी अपने बड़े भाई सट्टा (मटका) की तरह सट्टा खिलाने वाले को ही फायदा पहुंचाता है.

हो सकता है कि एक दो दिन कुछ बुकियों को नुकसान भी हो जाये, लेकिन ओवरऑल ये बुकियों के लिए बड़े ही फायदे का सौदा होता है. वहीं पंटर ओवरऑल हार में ही रहता है. पंटर पैसा गवांकर, बदनामी, डिप्रेशन, ऊंचे ब्याज पर कर्जदारी ले लेता है और अपना सुख चैन गंवा देता है. इसके बाद दुखी होकर पंटर कभी कभी नशेबाज भी बन जाता है, जिसका अंजाम अक्‍सर बहुत बुरा होता है. इसीलिए मैंने इसे दलदल कहा है, एक क्रूर दलदल!

अब हमें ये सोचना है कि देश की अमूल्य युवा पीढ़ी को इस दलदल से बचायें कैसे? सबसे पहले पुलिस से तो कोई उम्मीद ना करें, क्योंकि उन्होंने जब सट्टा (मटका) को खुलकर होने वाला अवैध व्यवसाय बना दिया तो वो भला इसे क्यों रोकेंगे? बस कभी बुकी उनकी फरमाइशों नजरअंदाज ना करे. इसको रोकने के लिए इसके खिलाफ ज्यादा से ज्यादा लिखा जाना चाहिए और और जो लिख नहीं सकते वो ऐसे लिखे लेखों, खबरों को ज्यादा से ज्यादा शेयर करके अपना योगदान दे सकते हैं. हां समस्या बड़ी है, सिर्फ लाइक से काम नहीं चलेगा. ज्यादा से ज्यादा शेयर तो करना ही पड़ेगा.

वहीं जितने भी घर के बड़े हैं, उनको अपने बच्चों पर पैनी नजर रखनी होगी कि उनका बच्चा कहीं सट्टेबाजी, नशेबाजी में तो लिप्त नहीं हो रहा है. और उनको हमेशा ये समझाना होगा कि लालच ही बर्बादी की पहली सीढ़ी होती है. उनको हमेशा मेहनत और ईमानदारी को सर्वोपरि मानने के लिए प्रेरित करना होगा.

धर्म गुरू भी सट्टे के खिलाफ फतवा निकालकर या ऐसा ना करने के लिए जनता को प्रवचन देकर, प्रेरित कर सकते हैं. जब जनता ज्यादा संख्या में खुलेआम होती सट्टेबाजी का विरोध करेगी तो सरकार इसको पुलिस प्रशासन के सहयोग से जरूर रोकेगी और हम आपको अपने देश के भले के लिए सट्टेबाजी के नर्क से देशवासियों को बचाने के लिए सड़क पर भी आना पड़ेगा.

आज संघर्ष करेंगे तभी कल इस अभिशाप से बच पायेंगे. हमें समझना और सबको समझाना होगा कि आईपीएल हो या कोई भी अन्य क्रिकेट मैच हो ये केवल रोमांच और मनोरंजन के लिए है ना कि सट्टेबाजी और अपना सुख चैन खोने के लिए.

विवेक गुप्‍ता की रिपोर्ट. विवेक दिल्‍ली-एनसीआर के विशेष संवाददाता हैं. इनसे संपर्क 8279755987 के जरिये किया जा सकता है.