4 वर्ष में रामनाईक ने मराठा वैभव से यूपी को महकाया

मनोज श्रीवास्तव

लखनऊ। चार वर्ष के कार्यकाल में राज्यपाल रामनाईक ने यूपी और महाराष्ट्र के बीच सांस्कृतिक, पौराणिक और राजनैतिक रिश्तों में नई सुगंध भर दिया। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में यूपी आये रामनाईक के लिए प्रारंभिक दिन बहुत चुनौतीपूर्ण रहे।

22 जुलाई 2014 को पद ग्रहण से पूर्व प्रदेश में स्थान्तरित किये गए तब निवर्तमान राज्यपाल अजीज कुरैशी ने आजम खान के चर्चित जौहर विश्वविद्यालय के पक्ष में बहुत दिनों से रुके विवादित मामले का फैसला करके माहौल गरमा दिया था।उस दिन के बाद आज चार साल पूरे हो गए रामनाईक ने कभी राजभवन पर अंगुली नहीं उठने दिया।

29-30 दिससम्बर 1916 में लखनऊ में सम्पन्न हुए कांग्रेस के अधिवेशन में बाल गंगाधर तिलक ने बोला था कि “स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा”। इसको लेकर 29-30 दिसंबर 2017 को लखनऊ में प्रदेश सरकार द्वारा एक वविशाल कार्यक्रम आयोजित कराया। नाईक ने ये राय अखिलेश सरकार को भी दिए थे लेकिन उन्होंने इनके सुझाव को बहुत संवेदना से नहीं लिया था।

लखनऊ में महाराष्ट्र दिवस मनवा कर यूपी और महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्रियों को बुला कर सांस्कृतिक एमओयू करवाया। लखनऊ विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी महाराज की विशालतम कांस्य प्रतिमा लगवाया। आगरा जेल में शिवजी के संदर्भ में लिखे गलत तथ्य को संशोधित करवाया।

डॉ भीमराव अम्बेडकर का नाम भीमराव रामजी आम्बेडकर करवाया। यूपी में छत्रपति साहूजी महाराज की जन्मतिथि 26 जुलाई को मनाई जाती रही जिसे महाराष्ट्र में सरकारी कमेटी भेज कर तथ्यों के आधार पर 26 जून करवाया। यूपी में महाराष्ट्र दिवस को सरकारी स्तर पर मनाने की शुरुआत करवा दिया। 24 जनवरी यूपी दिवस मनाने की शुरुआत करवाया।नाईक ने मुख्यमंत्री रहते अखिलेश को यूपी दिवस मनाने का सुझाव दिया था जिसे वह अनसुना कर दिए थे।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.