मौत के मुहाने पर एक गांव, गंगा कभी भी निगल सकती हैं जिंदगियां

अबुल कैश डब्‍बल

: सालों से नहीं हुई सुनवाई : बढ़ते जलस्‍तर से ग्रामीणों में दहशत : चंदौली। गंगा का बढ़ता जलस्‍तर बाढ़ राहत अधिकारियों के चेहरों पर भले ही मुस्‍कान ला रहा हो, लेकिन इसके किनारे बसे गांवों और ग्रामीणों की जिंदगी दशहत में बीत रही है। कौन सा दिन और कौन सी रात आखिरी हो जाए, कुछ पता नहीं। लंबे समय से चंदौली जनपद के धानापुर एवं चहनियां विकास खंड के तटवर्ती किनारे के निवासी दशहत की आगोश में जी रहे हैं।

पिछले कई दिनों से गंगा का बढ़ता पानी इनकी दशहत को लगातार बढ़ा रहा है। पिछले दो दिनों में ही लगभग पांच फुट गंगा के जल स्‍तर में वृद्धि हुई है, जो अभी जारी है। गंगा के करार पर स्थित सिर्फ नरौली गांव के पचासों ऐसे घर हैं, जो बाढ़ के दौरान खतरों से जूझते हैं। बाढ़ के दौरान इनकी नींद उड़ जाती है और वह रातों में दूसरे के घरों में शरण लेते हैं।

नरौली गांव निवासी वीरेंद्र निषाद, केशव निषाद, हरबंश निषाद, पुद्दन निषाद, रविन्द्र निषाद, उमेश निषाद,  महेंद्र निषाद, गोपाल, सुभाष, मिश्रीलाल, रामप्रसाद, सुग्गा, महेश, गणेश, हरिनारायण, श्री नारायण, रोहित मल्लाह  सहित और कई परिवार हैं, जो गंगा के करार पर बने क्षतिग्रस्त घरों में रहते हैं। बाढ़ के दौरान हर साल गंगा की लहरें इनके घरों की दीवार पर ठोकर मारकर इन्‍हें और कमजोर करती हैं।

कच्‍चा मकान गिरा : विगत दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से नरौली निवासी राधे देवी का कच्चा मकान भरभरा कर गिर गया। बताया जाता है कि राधे देवी अपने दो बच्चों सहित पूरे परिवार के साथ उसी कच्चे मकान में रहती हैं। गरीबी के कारण वर्षों पूर्व बना मिट्टी का मकान बीते कई वर्ष से जर्जर है। आवास के लिए गरीब ने कई बार प्रधान सहित ब्लाक मुख्यालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन आज तक आवास नहीं मिला। और आज वह बेघर हो गयी हैं।

दो घर कभी भी समा सकते हैं जल में : गंगा के बढ़ते जलस्तर और लगातार हो रही बारिश से गंगा तट पर स्थित नरौली निवासी कुद्दन और केशव के घर को गंगा कभी भी अपने आगोश में समाहित कर सकती हैं। बताया जाता है कि गांव में लगभग पचासों घर ऐसे हैं, जो कटान प्रभावित हैं, लेकिन इन दोनों लोगों का घर बिल्कुल करार पर स्थित है। बाढ़ के दौरान गंगा का पानी घर के दीवार तक पहुंच जाता है।

इस स्थिति में बाढ़ के समय वह अपने पूरे परिवार की जिंदगी दांव पर लगाकर जीवन व्यतीत करते हैं। हर साल जिला प्रशासन बाढ़ के दौरान स्थलीय निरीक्षण करता है। कुद्दन ने बताया कि अगर इस साल थोड़ा और बाढ़ बढ़ गया तो हम बेघर हो जाएंगे। छोटे से घर में वह अपने बच्चों, परिवार और जानवरों के साथ रहते हैं। बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक से कच्चे मिट्टी के घर को ढंक तो दिया है, लेकिन गंगा की धारा को वह बर्दास्त नहीं कर सकता।

ग्रामीणों ने बताया कि रविवार को उपजिलाधिकारी सकलडीहा आये थे, जो खानापूर्ति कर चले गए। किसी भी ग्रामीण से कुछ जानकारी नहीं लिया। ग्रामीणों ने आक्रोशित मन से कहा कि हर साल सरकार के नुमाइंदे बाढ़ के दौरान आते है और मात्र आश्वासन देकर फ़ोटो खिंचवा कर चले जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा है कि सरकार भले ही बदल गयी है, लेकिन समस्या हम लोगों की वही है।

उनका कहना है कि दो साल पूर्व तत्‍कालीन जिलाधिकारी ने जमीन आवंटित कर करार पर स्थित परिवार को अन्यत्र बसाने की बात कही थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति तटवर्ती गांव के लोगों में आक्रोश है। ग्रामीण इसके पहले भी गंगा कटान एवं इससे होने वाली नुकसान को लेकर आंदोलन प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो पाई है।