प्रियंका ने की यूपी कांग्रेस की माइक्रोसर्जरी, बदले गये जिलाध्‍यक्ष

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: युवाओं को दी गई तरजीह : दलबदुलओं पर नहीं जताया भरोसा : लखनऊ। लोकसभा चुनाव में बुरी तरह पराजित कांग्रेस को नये सिरे से खड़ा करने की कोशिश जारी है। उत्‍तर प्रदेश में संगठन की ओवरहालिंग में लगी कांग्रेस ने अजय कुमार लल्‍लू को अध्‍यक्ष बनाने के बाद 51 जिलों में नये अध्‍यक्षों की भी नियुक्ति कर दी है। यूपी में अपना दल से भी नीचे पहुंच चुकी कांग्रेस नये सिरे से जमीन तलाशने में जुटी हुई है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्‍यक्ष पद से हटने के बाद अब यूपी में केवल राष्‍ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की तूती बोल रही है।

प्रियंका की पसंद अजय कुमार लल्‍लू के अध्‍यक्ष बनने के बाद से ही कयास लगाया जा रहा था कि इस बार ‘पूरे घर के बदल डालूंगा’ की तर्ज पर फेरबदल होगा। कांग्रेस की इस नियुक्ति के बाद यह तय हो गया है कि अब कांग्रेस पुरनियों के चंगुल से निकलकर युवाओं के हाथ में जाने को तैयार है। इससे पुराने कांग्रेसियों में कसमसाहट भी है। प्रियंका के करीबी महासचिव वेणुगोपाल ने यूपी के 75 में से 51 जिलों के अध्‍यक्षों की सूची जारी की है।

फतेहपुर के अखिलेश पांडेय और बलरामपुर के अनुज कुमार सिंह को छोड़कर 49 जिलाध्‍यक्षों को बदल दिया गया है। नई सूची में सामाजिक, जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाये रखने का प्रयास किया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल कार्यकर्ताओं का है। पार्टी ने अपनी युवा शाखा युवक कांग्रेस और छात्र विंग एनएसयूआई के युवाओं एवं वफादारों को संगठन में महत्‍व दिया है। यूपी में कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि उसके पास कोई जुझारू चेहरा नहीं है।

कांग्रेस की यूपी में ऐसी साख बची है, जिससे जनता उससे जुड़ने को बेचैन हो। कांग्रेस ने इस बदलाव के जरिये सभी मंडलों को मजबूत करने का प्रयास किया है, लेकिन पुरनियों के चक्रव्‍यूह से निकलकर पार्टी को मजबूत करना नये लोगों के लिये आसान नहीं होगा। पार्टी ने दलबदलुओं को साइडलाइन कर दिया है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, आगरा जैसे जिलों में भाजपा को मुख्‍य प्रतिद्वंद्वी मानकर कांग्रेस ने अपने जिलाध्‍यक्ष तय किये हैं।

सवाल यह है कि सपा और बसपा से भी नीचे के पायदान पर खड़ी कांग्रेस इस बदलाव से कितना चमत्‍कार करती है देखने वाली बात होगी। वह तभी तब, जब पार्टी के दिग्‍गज रोज बगावती मूड में आ रहे हैं और मजबूत गढ़ दरक रहा है। रायबरेली विधायक अदिति सिंह की बगावत के बाद बनारस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने भी अपने तेवर दिखाये। प्रतापगढ़ में तीन बार की सांसद तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश सिंह की पुत्री रत्‍ना सिंह का भाजपा के साथ जाना बड़ा झटका है।