…तो क्‍या इस डर से मोदी ने बढ़ा दिया यूपी में अपना दौरा!

नरेंद्र श्रीवास्तव

: मोदी का चुनाव अभियान यूपी में एक महीने में 6 स्थानों तक पहुँच गया : लखनऊ : लोकसभा चुनाव सिर पर है। सभी जानते हैं कि चुनाव में मोदी एक बड़ा फैक्टर हैं। चुनाव प्रो मोदी या एन्टी मोदी ही होगा। राजनीतिक पार्टियां गौण होंगी। यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पता है। उन्हें यह भी मालूम होगा कि यूपी फतह नहीं हुआ तो दिल्ली दूर हो सकती है इसलिए वह यूपी को भरपूर समय दे रहे हैं।

समय देने का एक बड़ा कारण सपा और बसपा का सम्भावित गठबंधन माना जा रहा है। मोदी जानते होंगे कि गठबंधन हुआ तो 2014 का परिणाम पलट सकता है। कुछ राजनीतिक पंडितों के मुताबिक यह 73-7 के बजाय 7-73 भी हो सकता है। हो सकता है इसमें अतिश्योक्ति हो, पर लगता है मोदी इसे भांप गये हैं, इसीलिए उन्होंने यूपी में अपनी आमदरफ्त काफी बढ़ा दी है।

आमतौर पर सपा को पिछड़ों और बसपा को दलितों की पार्टी माना जाता है। इन दोनों वर्गों की जनसंख्या राज्य में तकरीबन पचास फीसदी के आस-पास है। दोनों के एक मंच पर आते ही इनके साथ मुस्लिम भी जुड़ सकते हैं। यूपी में मुसलमानों की आबादी 18 फीसदी से अधिक है। अधिकांश दलित, पिछड़े और मुस्लिम एकजुट होते हैं तो यह एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनेंगे। चुनाव में इन्हें हरा पाना मोदी और उनकी पार्टी के लिए काफी मुश्किल रहेगा।

मोदी इसे बखूबी समझ रहे हैं। इसीलिए वह अपने को पिछड़े वर्ग का बताने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। संसद में उन्होंने इसकी खुलेआम घोषणा भी की। दलितों और पिछड़ों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए भाजपा अति दलित और अति पिछड़ा का कार्ड भी खेल रही है। भाजपा नेता आरोप लगाते हैं कि सपा शासन में केवल यादवों और बसपा शासन में दलित वर्ग की एक ही जाति का बोलबाला रहता है जबकि अन्य जातियां उपेक्षित रहती हैं।

यह कहकर भाजपा अन्य जातियों को अपनी ओर आकर्षित करने की जीतोड़ कोशिश में लगी हुई है। इसी कोशिश के तहत मोदी डा. भीम राव अम्बेडकर से जुड़े पांच स्थलों को पंच तीर्थ बना रहे हैं। कबीर पंथियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। 28 जून को इसी मकसद से वह कबीरदास की निर्वाण स्थली मगहर गये। लम्बा चौड़ा भाषण देकर कबीरपंथियों को आकर्षित करने की कोशिश की। मगहर कबीर पीठ के विचारदास के अनुसार देश में कबीरदास के करीब दो करोड़ अनुयायी हैं।

मगहर से शुरू हुआ मोदी का चुनाव अभियान यूपी में एक महीने में 6 स्थानों तक पहुँच गया। भाजपा के एक नेता के अनुसार श्री मोदी चुनाव तक एक महीने में औसतन कम से कम चार बार यूपी का दौरा करेंगे। मोदी को पता है कि सपा, बसपा के एक मंच पर आते ही उनके लिए दिल्ली दूर हो सकती है।

सामाजिक समीकरण के अनुसार विपक्षी दलों का गठबंधन भाजपा पर भारी पड़ सकता है। इसकी काट के लिए मोदी और उनकी पार्टी हर मुमकिन कोशिश करेगी। इसीलिए उन्होंने एक महीने में ही मगहर, आजमगढ़, मिर्जापुर, वाराणसी, शाहजहांपुर और लखनऊ में 7 कार्यक्रम कर डाले।

लोकसभा चुनाव भले अगले साल हों, जो बात मोदी को दिख रही है, विपक्ष भी वही देख रहा है। नतीजतन दूसरे दल भी इसीलिए अभी से तैयारियों में लग गये हैं। सभी जानते हैं कि दिल्ली के लिए यूपी फतह जरूरी है। राजनीतिक दृष्टि से यह राज्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। लोकसभा की 80 सीट इसी राज्य में है। 2014 के चुनाव में 73 सीटें जीतकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनायी। मोदी को पता है कि यूपी फतह होने पर ही दिल्ली में बहुमत की सरकार बनायी जा सकेगी।

मोदी की तमाम कोशिशों के बावजूद सपा, बसपा ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा तो उनके लिए दिल्ली दूर हो सकती है। गठबंधन में यदि कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल शामिल हुआ तो यह सोने पे सुहागा साबित होगा। ऐसे में सम्भावित गठबंधन से पार पाने के लिए मोदी के पास अयोध्या और कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों का सहारा लेने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।

लेखक नरेंद्र श्रीवास्‍तव उत्‍तर प्रदेश के जानेमाने वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. वह लंबे समय से यूएनआई से जुड़े हुए हैं.