यहां तक कि लालू यादव भी मोदी से बेहतर ही होंगे

भाजपा

: किया-धरा कुछ नहीं गिलास तोड़ा अलग से! : देखिए, मैं कोई भारतीय जनता पार्टी या माननीय नरेंद्र मोदी जी का विरोधी नहीं हूँ और चाहता हूँ कि वे 2024 तो मारो गोली 2039 तक निष्कंटक राज करें। मगर मेरे चाहने से क्या होता है! मतदाता उनकी सत्ता उखाड़ फेंकने को तत्पर है। उसको लगता है कि आज चुनाव हों तो वह आज ही सत्ता के घमंड में चूर इन मोदियों, योगियों, त्रिविक्रमों और मामाओं को सत्ता से बेदखल करे।

कुछ नहीं किया इन लोगों ने। सिर्फ बातें की, मंहगे से मंहगे वस्त्र पहने, घूमे-फिरे और ऐयाशियाँ कीं।  इन लोगों से आर्थिक सुधार या देश की तकनीकी तरक्की की उम्मीद तो वैसे भी नहीं थी। इन्होंने तो हिंदू धर्म को भी विश्व भर में विदूषक धर्म बना दिया है। “किया-धरा कुछ नहीं गिलास तोड़ा अलग से”! लोगों को रोज़गार नहीं है, किसान के पास खेती नहीं बची, व्यापारियों से बनिज छीना, बस खुद ऊट-पटांग बयान देंगे और मटरगश्ती करेंगे।

अगर ये भाजपा के नेता अपनी पार्टी की जड़ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सिद्धांतों पर भी अमल करते तो भी शायद मुंह छिपाने की गुंजाइश तो रहती कि चलो सादगी का जीवन जिया। मगर इन सब के हिस्से में है सिफर। ऐसे में ये किस मुंह से वोट मांगेंगे! ये लोग यह सोच कर खुश होते हैं कि हमारा कोई विकल्प नहीं, तो यह उनकी खामख्याली है। जिन राहुल गांधी को ये पप्पू कहते हैं, वे भी विकल्प हो सकते हैं और तमाम प्रादेशिक क्षत्रप भी। यहाँ तक कि लालू यादव भी मोदी से तो बेहतर ही होंगे।

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभुनाथ शुक्‍ल के फेसबुक वाल से साभार.