जीएसटी के बाद मनोरंजन कर निरीक्षक अधर में लटके, नहीं मिल रहा वेतन

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: एक साल बाद भी मामला निस्‍तारण नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी : लखनऊ : जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश सरकार ने मनोरंजन कर विभाग को वाणिज्‍य कर के अधीन कर दिया था, लेकिन अब तक संविलनीकरण नहीं किए जाने से मनोरंजन कर निरीक्षक उहापोह की स्थिति में हैं। मनोरंजन विभाग से आए लोगों को वेतन भी नहीं मिल रहा है, जिसके चलते उनमें नाराजगी है। वा‍णिज्‍य कर विभाग के अधिकारियों द्वारा इसमें दिलचस्‍पी नहीं लिए जाने से मनोरंजन कर विभाग से आए कर्मचारी परेशान हैं।

इस सदंर्भ में मंगलवार को जवाहर भवन के सभा कक्ष कार्यकारिणा की बैठक बुलाया गया था, जिसमें कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया। अधिसूचना व शासनादेश द्वारा मनोरंजन कर विभाग को समाप्त करते हुए वाणिज्य कर विभाग के पर्यवेक्षण व नियंत्रण में इसके समस्त कार्मिकों को कार्य करने से सम्बन्धी निर्देश दिये गये थे। आमोद और पणकर निरीक्षक के सम्बन्ध में संविलीनीकरण किये जाने हेतु बाद में निर्णय किये जाने का उल्लेख है, अधिसूचना हुए लगभग 2 माह व्यतीत हो रहे है, किन्तु आमोद एवं पणकर निरीक्षक के संविलीनीकरण के  सम्बन्ध में कोई निर्णय अब तक न लिये जाने पर सदस्यों ने घोर निराशा व्यक्त की।

अधिसूचना/शासनादेश के अनुपालन में समाप्त मनोरंजन कर  विभाग के कार्मिकों के विषय पर  वाणिज्य कर के पर्यवेक्षण व नियंत्रण की व्यवस्था स्थापित नहीं हो पायी है, जिससे वित्तीय, सेवा सम्बन्धी आदि प्रकरणों का निस्तारण न हो पाने व वेतन न मिलने पर सदस्यों द्वारा असंतोष व्यक्त किया गया। अधिसूचना/शासनादेश के विपरीत पूर्व की व्यवस्था यथावत चल रही है, जबकि पूर्व के समाप्त मनोरंजन कर विभाग के अधिकारियों के पास पर्यवेक्षण व नियंत्रण के अधिकार नहीं रह गये हैं। वे पूर्व पदनाम व वर्तमान पदनाम के साथ क्षेत्राधिकार से बाहर जा कर  विधि विरूद्ध ढंग से कार्य कर रहे हैं, जो कि विधि सम्मत नहीं है।

उपरोक्त सम्बन्ध में कमिश्नर, वाणिज्य कर से इस आशय का निवेदन करने पर सहमति व्यक्त की गयी कि वाणिज्य कर विभाग का पर्यवेक्षण व नियंत्रण की व्यवस्था लागू करते हुए समस्त कर्मचारियों के सेवा सम्बन्धी अभिलेख, पूर्व मनोरंजन कर आयुक्त कार्यालय जवाहर भवन से वाणिज्य कर विभाग में स्थापित व्यवस्था के अनुरूप, वाणिज्य कर  मुख्यालय गोमतीनगर एवं सम्बन्धित जोनल कार्यालयों को हस्तांतरित करने हेतु किया जाय, जिससे कि वेतन, वेतनवृद्धि, अवकाश, जीपीएफ, पेंशन आदि का कार्य, शासन एवं शासनादेश की मंशा के अनुरूप, सुगमतापूर्वक यथासमय निस्तारित हो सके।

इसके साथ मनोरंजन कर निरीक्षकों के संविलीनीकरण व अन्य सेवा सम्बन्धी अवशेष प्रकरणों का निस्तारण शासन द्वारा शीघ्र करवाने के सम्बन्ध में, आयुक्त महोदया से अनुरोध करने पर सहमति व्यक्त की गयी।  इस हेतु आयुक्त महोदया को प्रति सप्ताह अनुस्मारित कराने व अन्य उच्च अधिकारियों को आवश्यकतानुसार अनुस्मारित कराने का निर्णय लिया गया। सदस्यों द्वारा इस बात पर काफी असंतोष व्यक्त किया गया कि पिछले एक वर्ष में एक दर्जन से अधिकर बार प्रत्यावेदन दिये जाने और समय-समय उच्च अधिकारियों के समक्ष व्यक्तिगत मिल कर संविलय के सम्बन्ध में कार्यवाही का तथ्यात्मक एवं तर्कपूर्ण अभिलेखों सहित अनुरोध किया किया।

इसके बावजूद विसंगति पूर्ण अधिसूचना संख्या-624 दिनांक 24.04.2018 निर्गत की गयी तथा निरीक्षकों को अधर में लटका दिया गया, जबकि अधिसूचना जारी होने की तिथि से ही मनोरंजन कर विभाग समाप्त कर दिया गया।  मंत्रिपरिषद द्वारा इस सम्बन्ध में निर्णय दिनांक 06.02.2018 को लिया गया। अधिसूचना इतने विलम्ब से मंत्रिपरिषद के निर्णय से इतर किन परिस्थितियों में जारी की गयी, के  सम्बन्ध में पृथक से प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर सहमति व्यक्त की गयी।

कर्मचारियों ने रोष जताते हुए आरोप लगाया कि जीएसटी लागू हुए एक वर्ष का समय समाप्त हो रहा है और अब तक कोई ठोस निर्णय न होना दुःखद व हास्यास्पद है, जबकि उत्तराखण्ड सरकार ने जीएसटी लागू होने के तीन माह के अन्दर संविलय की प्रक्रिया पूरी कर ली। उन्‍होंने चेतावनी दी कि उपरोक्त स्थितियों में यदि एक माह के अन्दर अवशेष प्रकरणों का निराकरण नहीं होता तो सभी निरीक्षक, पूर्व मनोरंजन कर विभाग के जनपदीय अधिकारियों द्वारा क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर दिये जा रहे निर्देशों का अनुपालन न करने के लिए बाध्य होंगे।

मनोरंजन विभाग के कर्मचारियों ने वाणिज्‍य कर विभाग को दिए गए सभी प्रत्यावेदनों में उल्लेख किया गया है कि उत्पन्न मानसिक अवसाद से उबरने के लिए दिनांक 23 जुलाई 2018  से 1 अगस्‍त 2018 तक प्राथमिक चरण में,  समस्त निरीक्षकगण सामूहिक अर्जित अवकाश लेकर, सामूहिक उपवास रखते हुए लखनऊ पूर्व मनोरंजन कर आयुक्त कार्यालय जवाहर भवन में सफेद फीता बांध कर प्रकरण की गम्भीरता पर उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करने हेतु प्रातः 10.00 बजे से 5.00 बजे तक एकत्र होकर अनुरोध करेंगे।

कर्मचा‍री नेता ने बताया कि उपवास अवधि में प्रतिदिन संघ का एक प्रतिनिधि मण्डल कमिश्नर महोदया से मिल कर अनुरोध करेगा व आवश्यकतानुसार शासन व सरकार के सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष अनुरोध करने पर भी विचार होगा। सभी सदस्य 01 जुलाई 2018 जीएसटी लागू होने के एक वर्ष पूर्ण होने एवं उपरोक्त समस्याओं के समाधान के अनुरोध एवं सामूहिक उपवास हेतु,  अर्जित अवकाश हेतु सामूहिक प्रार्थना पत्र कमिश्नर महोदया को प्रेषित करेंगे। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों एवं मुख्‍यमंत्री से भी संपर्क किया जाएगा। बैठक में अध्‍यक्ष समर सिंह एवं महामंत्री बीबी सिंह समेत राघवेंद्र प्रताप सिंह तथा कई कर्मचारी उपस्थित रहे।