अक्टूबर में हो सकता है बिजली संकट : आंदोलनकारियों ने सरकार पर लगाया हड़ताल थोपने का आरोप

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निजीकरण में विरोध में बिजलीकर्मियों का आंदोलन जारी :                                                    ● हड़ताल के मूड में दिख रहे बिजलीकर्मी :
चंदौली : प्रदेश में गत दो पखवारे से चल रहा बिजलीकर्मियों का आन्दोलन अब उग्र होने लगा है। आंदोलनकारी बिजलीकर्मी प्रदेश सरकार की हठधर्मिता के चलते अक्टूबर के महीने में बिजली संकट पैदा कर सकते हैं। बिजलीकर्मी पूरी तरह कामबंद कर हड़ताल पर जाने के मूड में हैं।

विदित हो कि प्रदेश सरकार बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया को अमल में लाना चाहती है। जिस कारण प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी इसे जनविरोधी बताते हुए गत दो पखवारे से आंदोलनरत हैं।

बिजलीकर्मी चरणबद्ध तरीके से आन्दोलित है। उधर सरकार ने भी पावर ग्रिड तथा एनटीपीसी के कर्मचारियों को सतर्क रहने का निर्देश जारी किया है।

पीडीडीयू नगर के गोधना स्थित विद्युत वितरण मण्डल कार्यालय पर चल रहे बिजलीकर्मियो के विरोध सभा को संबोधित करते हुए उप्र विद्युत अभियन्ता संघ के नेता प्रवीण कुमार सिंह ने खेद प्रकट कियाा।

कहा कि न चाहते हुए भी हम सरकार के हठधर्मिता के चलते सम्भावित विद्युत संकट को नहीं टाल सकते। आज हमारे समक्ष स्वयं रोजी रोटी का यक्ष प्रश्न प्रश्नचिन्ह बनकर खड़ा है।

उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब उर्जा विभाग सार्वजनिक क्षेत्र में उपभोक्ताओं,किसानों तथा मजदूरों को सस्ती विद्युत दर पर बिजली उपलब्ध नहीं करा सकती तो पूंजीपतियों से सस्ती बिजली लेने का सरकार के पास क्या फार्मूला है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक और सभा की अध्यक्षता कर रहे नरेन्द्र गोपाल शुक्ला ने कहा कि निजीकरण के पश्चात् कर्मचारियों समेत उपभोक्ताओं का भी बेतहाशा आर्थिक शोषण होगा।

अन्य प्रदेशों के सस्ते विद्युत दर पर श्री शुक्ला ने बताया कि उन प्रदेशों की सरकारों द्वारा निजी विद्युत प्रदायी संस्थाओं को सब्सिडी दी जाती है। जिससे वहां का विद्युत दर सामान्य अथवा सामान्य से भी कम होता है।

उ प्र सरकार सिर्फ बेचने पर विश्वास करती है। यदि सरकार चाहे तो सब्सिडी देकर उपभोक्ताओं को राहत और अपनी सम्पत्ति को बर्बाद होने से बचा सकती है।

बावजूद इसके सरकार कर्मचारियों के जीपीएफ,सीपीएफ का पैसा बेच चुकी है। अब विभाग को ही बेचना चाहती है। सभा में सर्वेश पान्डेय, प्रवीन कुमार सिंह,आकाश सिंह,

मेहदी,दलसिगार यादव,रामपाल,एके शुक्ला,सेवा राम,सुभाष यादव,आर बी यादव, प्रमोद राम,घनश्याम,मनोज पटेल,मनीष कन्नौजिया,अरविन्द कुमार,नफीस अहमद,डीके पान्डेय,

जयकार पटेल,कैलाश सोनकर आदि नेताओं ने सम्बोधित करते हुए एक स्वर में कहा कि हम हड़ताल कर उपभोक्ताओं के समक्ष बिजली संकट नहीं पैदा करना चाहते।

परन्तु सरकार के रवैये से लगता है हड़ताल थोपा जा रहा है। सभा का संचालन एके पान्डेय ने किया।