अग्रहार साहित्यि‍क समूह ने कराया ऑनलाइन काव्‍य गोष्‍ठी, कवियों ने जमाया रंग

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: नये दौर के साथ नई तकनीक का हुआ इस्‍तेमाल : पडरौना : अग्रहार  साहित्यिक समूह की कवि गोष्ठी ऑनलाइन संपन्न हुई। रविवार को  दिन में 1:00 बजे से व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से गोष्‍ठी का प्रारंभ हुआ, जिसमें सर्वप्रथम सुजीत कुमार पांडे ने सरस्वती वंदना पढ़कर गोष्ठी की शुरुआत की, तत्पश्चात असलम बैरागी ने अपने हास्य व्‍यंग्‍य कविता से सभी को लोटपोट कर दिया। इसके बाद मैतुल मस्ताना ने गीत प्रस्तुत किया, जिसके बाद गजलों और कविताओं का लम्बा दौर चला।

इस क्रम में पत्रकार और कवि अम्बुजेश शुक्ल ने अपनी गजल तेरी ऊंची उडानों से डर लगता है, तेरे हजारों दीवानों से डर लगता है पेश की। उनके बाद अवध किशोर अवधू, रामपति रसिया, मदन मोहन पांडे, आरके भट्ट बांवरा, आकाश महेशपुरी, सार्जेंट अभिमन्यु पांडेय, कृष्णा श्रीवास्तव, जगदीश खेतान, मधुसूदन पांडे, शैलेंद्र असीम, डॉ. इंद्रजीत मिश्र, जितेंद्र पांडे, डॉक्टर इम्तियाज समर,  मुजीब सिद्दीकी मौज, संजय मिश्रा, संजय एवं रेणुका चौहान ने अपनी अपनी रचना पढ़ी तथा गोष्टी को सफल बनाया।

गोष्‍ठी के प्रारंभ में ही संस्था के अध्यक्ष सार्जेंट अभिमन्यु पांडे ने संस्था के विषय में एक सामान्य परिचय दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता विमर्श साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष आर के भट्ट बावरा तथा सफल संचालन आकाश महेशपुरी ने किया। अंत में संस्था के अध्यक्ष सर्जेंट अभिमन्यु पांडे सभी कवियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। गोष्ठी में ऑनलाइन श्रोता साहित्य प्रेमी डीके पांडे एवं ज्ञान वर्धन गोविन्द राव ने कवियों की हौसला अफजाई की।

आपको बताते चलें कि अग्रहार साहित्यिक संस्था की स्थापना करीब 21 साल पहले अभिमन्यु पांडे, स्वर्गीय डॉ. दुक्खी शुक्ल समेत क्षेत्र के साहित्य प्रेमियों के प्रयासों के फलस्वरूप हुई थी, जिसका मकसद क्षेत्र की साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच देना था। इस क्रम में ये संस्था अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रही है,  और हर तीसरे महीने के आखिरी रविवार को होने वाली संस्था की गोष्ठी में नित नई प्रतिभाओं को अवसर मिलता है।  संस्था से जुड़े कई कवि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काव्य प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं।