…और इस तरह ‘पंख’ को फैला रहे हैं अशु बग्‍गा

अंबेडकरनगर : समाज सेवा की बात चले और धर्मवीर बग्गा की चर्चा ना हो कदापि संभव नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि टांडा की सरजमीं से निकलकर देश के विभिन्न हिस्सों में धर्मवीर बग्गा ने समाज सेवा का जो कीर्तिमान स्थापित किया है उसकी मिसाल बहुत कम ही मिलती है। इसलिए उनकी चर्चा के बिना समाज सेवा की चर्चा अधूरी समझी जाती है। आज वे देश के तमाम युवाओं के प्रेरणा स्रोत हैं।

धर्मवीर बग्गा को अपना आदर्श मानने वालों की एक लंबी फेहरिस्त में शामिल अंशु बग्गा भी उन्हीं के नक्शे कदम पर बढ़ चले हैं। आज अंशु बग्गा जागरूक युवाओं की एक टीम के साथ जन जागरूकता के लिए पंख फैला रहे हैं। गंगा जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल टांडा कस्बे में 19 नवंबर 1985 को जन्मे अंशु बग्गा ने थोड़े ही दिनों के प्रयास में कई अवार्ड और सम्मान हासिल किए हैं।

कन्या भ्रूण हत्या, यातायात, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्वास्थ्य, जनसंख्या नियंत्रण, लिंगानुपात तथा शिक्षा के प्रति जागरूकता को उन्होंने अपने जीवन का अंग बनाया। इसके लिए उन्होंने सितंबर 2014 में अजय प्रताप श्रीवास्तव, सुयश पांडेय, गप्पू चौधरी, काशिफ अहमद और गयासुद्दीन जैसे तेज तर्रार युवाओं के साथ मिलकर पंख नामक स्वयंसेवी संस्था का ढांचा खड़ा किया जो उम्मीद की एक उड़ान के साथ अब व्यापक हो चला है।

इसी बैनर तले अब अंबेडकरनगर के अलावा प्रदेश के दूसरे जनपदों में जागरूकता का पंख फैल रहा है। आजमगढ़ में प्राची बरनवाल, प्रतापगढ़ में सोनू त्रिपाठी, फैजाबाद में प्रतीक अग्रवाल और लखनऊ में सीमा सिन्हा को नेतृत्व सौंपा गया है। बकौल अंशु उन्होंने 4 वर्ष पूर्व दीपावली के दिन समाज सेवा का जो बीड़ा उठाया आज वह व्यापकता की ओर अग्रसर है।

अब तक संस्था की ओर से उन्होंने मिट्टी का बर्तन बनाने वाले 4 परिवारों को इलेक्ट्रॉनिक चाक मशीन देकर उनके काम को आसान किया है। इसके लिए उन्होंने ऐसे परिवारों का चयन किया है जिनके घरों में बेटियां हैं। आगे चलकर तमाम सामाजिक बुराइयों ने उन्हें जब कुरेदना शुरू किया तो फिर अभियान चल पड़ा। उनका कहना है कि आज जनसंख्या वृद्धि, कन्या भ्रूण हत्या और लिंगानुपात का बिगड़ता संतुलन एक बड़ी समस्या है।इसके लिए व्यापक अभियान चलाया।

इसी के साथ यातायात जागरूकता के लिए नए-नए तरीके भी अपनाए। युवाओं की टोली के साथ यमराज की वेशभूषा में चल रहे युवक ने इस अभियान के तहत लोगों से यही कहा कि यातायात के नियमों का पालन करो या फिर मेरे साथ चलो। इसकी भी खूब चर्चा हुई। बिना हेलमेट चल रहे लोगों के मासूम बच्चों को प्रभावित कर उन के माध्यम से जागरूकता फैलाई। अब पर्यावरण संरक्षण के लिए बर्ड प्याऊ लगवा रहे हैं।

अंशु बग्गा का कहना है कि समाज सेवा का जज्बा उनके दादा स्वर्गीय करतार सिंह ने भरा था और पिता सतनाम सिंह बग्गा ने कभी रोका नहीं। इसी बीच चाचा धर्मवीर बग्गा ऊर्जा के स्रोत बने। वर्तमान में उन्हें पावर विंग्स, मदर लैप्स, उर्मिला सुमन द फाउंडेशन, औरा फाउंडेशन तथा गो ग्रीन फाउंडेशन का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

घनश्‍याम भारतीय की रिपोर्ट.