जाते-जाते पीएम मोदी को श्राप दे गये स्वामी सानंद

हरेन्द्र शुक्ला

: गंगा की प्राण रक्षा ख़ातिर प्रार्णों की आहुति दी गंगापुत्र : सरकार की संवादहीनता का परिणाम है सानंद जी का मौत -प्रो विश्वम्भरनाथ मिश्र, गुरु अविमुक्तेश्वरानंद ने भी उठाई सीबीआई जांच की मांग : वाराणसी। वर्षो से गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए संघर्ष कर रहे प्रो जी डी अग्रवाल ( अब स्वामी सानंद) ने गंगा की टेक पर अपने प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी जी गंगा की प्राण रक्षा से जुड़ी तीन मांगों को लेकर बीते 113 दिनों से आमरण अनशन पर थे। अनशन शुरु करने से पहले स्वामी जी ने गंगा की प्राण रक्षा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को छोटा भाई संबोधित करते हुये एक मार्मिक पत्र भी लिखा था। लेकिन सरकार की उपेक्षा का दंश उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।

बड़ी बात यह कि प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में गंगा रक्षा की अपील के साथ ही स्वामी सानंद ने अनहोनी पर उन्हें दंण्ड भोगने का श्राप भी दिया था। पूरे देश में आज स्वामी सानंद का मां गंगा के लिए बलिदान उनकी मार्मिक पत्र ही मुख्य चर्चा का विषय रहा। स्वामी जी के बलिदान से पूरा देश स्तब्ध है। बताते चले कि गंगा की स्वच्छता, अविरलता और पर्यावरणीय संरक्षण की मांग को लेकर हरिद्वार में 111 दिन से बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे प्रो जी डी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद की गुरुवार को हरिद्वार से इलाज के लिए दिल्ली ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

गंगा की अविरलता की मांग को लेकर स्वामी सानंद 22 जून 2018 से भूख हडताल पर थे। सरकार की ओर से उपेक्षात्मक रवैया अपनाये जाने से क्षुब्ध होकर उन्होने 9 अक्टूबर से जल त्याग शुरु कर दिया था। जल त्याग के बाद उतराखंड प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई। प्रो जी डी अग्रवाल आखिरी बार गत अप्रैल को बनारस आकर संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वम्भरनाथ मिश्र से तुलसीघाट स्थित उनके आवास पर मिले थे। भेंट के दौरान गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए सरकार की उपेक्षित रवैये से क्षुब्ध स्वामी सानंद जी रो पड़े थे और उन्होने यह आशंका भी जताई थी कि शायद अब मैं दुबारा काशी न आ सकूं। उन्होने यह भी कहा था कि हरिद्वार में अनशन करुंगा और अंतिम सांसो तक संघर्ष करुंगा। उनकी यह बात आखिरकार उनकी मौत के साथ ही आज सच साबित हो गई।

सरकार की संवादहीनता का परिणाम है सानंद जी की मौत – प्रो विश्वम्भरनाथ मिश्र

स्वामी सानंद की मौत से व्यथित संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि यह मार्मिक घटना सरकार की संवेदनहीनता का परिणाम है। सानंद जी आखिर  महज मां गंगा की निर्मलता और अविरलता ही सरकार से मांग रहे थे।  प्रो जी डी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद जी आईआईटी कानपुर में डीन रहे। गंगा के प्रति उनकी अटूट आस्था थी । केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े रहे। वह कोई साधारण इंसान नहीं थे। उनका इस तरह जाना छोटी बात नहीं है। इसके लिए कहीं न कहीं केंद्र व उत्तराखंड सरकार जिम्मेदार है।

प्रो मिश्र ने भावुक होते हुये कहा कि गत 20 अप्रैल 2018 को प्रो जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद जी उनके तुलसीघाट स्थित आवास पर शाम को आये थे । वह काफी भावुक नजर आ रहे थे, उन्होंने कहा कि मुझे अब जीने की भूख नहीं रही, जब मां (गंगा) के लिए कुछ कर नहीं सकता तो ऐसे शरीर से क्या लेना देना। अब तो आप जैसे शुभेक्षुओं से यह सोच कर अंतिम बार मिलने आया हूं कि अब देह त्याग दूंगा। प्रो मिश्र ने कहा कि प्रो अग्रवाल जी एक संवेदनशील व्यक्तित्व वाले इंसान थे। उन्हें यह विश्वास हो गया था कि मौजूदा सरकार गंगा के लिए कुछ नहीं करने वाली है।

प्रो मिश्र ने कहा कि मैं तो हरिद्वार जाना चाहता था, लेकिन तब तक उनके निधन की सूचना आ गई। वैसे मैंने अपने लोगों से जो हरिद्वार में रहते थे उनसे गुजारिश की थी कि वे प्रोफेसर साहब से आग्रह करिएगा कि वो जल त्याग न करें। शरीर त्यागने का फैसला छोड़ दें। मैने तो अपना अभिभावक ही खो दिया है। कहा कि इसी तरह गंगा के लिए जीवन भर संघर्ष करते करते पिता प्रो वीरभद्र मिश्र 2013 में छोड़ कर चले गए, अब पिता व गुरु तुल्य स्वामी प्रो जीडी अग्रवाल भी नहीं रहे। जब वह तुलसीघाट आये थे तब मैने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की थी कि आज कोई नहीं सुन रहा, पर वक्त बदलेगा, सुनवाई होगी, जीवन त्यागने की बात न करें। आप रहेंगे तो ही यह लड़ाई लड़ी जाएगी।

आपका रहना नितांत जरूरी है। लेकिन वह इस मौजूदा सरकार के रवैये से अंदर से इतना टूट चुके थे कि उन्होंने मेरी बातों पर शायद गौर नहीं किया। दरअसल वह एक बहुत ही सहृदय, अति संवेदनशील इंसान रहे। एक वैज्ञानिक, टेक्नीशियन के साथ उनका मां गंगा के प्रति लगाव ही था कि पिता स्व प्रो वीरभद्र मिश्र जी के साथ ही उन्होंने संकटमोचन फाउंडेशन के लिए काम किया था। हम लोगों को जहां कहीं कोई दिक्कत होती वह तुरंत सहायता के लिए खड़े हो जाते थे।

सानंद जी की मौत की जांच सीबीआई से कराये सरकार – अविमुक्तेश्वरानंद

प्रो जी डी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद जी के आध्यात्मिक गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उनकी मौत को हत्या करार दिया है। मीडिया को जारी विज्ञप्ति में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि स्वामी सानंद की शव का पोस्टमार्टम होना चाहिए।

उन्होने ने कहा कि यह कैसे हो सकता है की जो व्यक्ति आज सुबह तक स्वस्थ अवस्था में रहे और अपने हाथ से ही प्रेस विज्ञप्ति लिखकर जारी करे। 111 दिनों तपस्या करते हुए आश्रम में तो स्वस्थ रहे पर अस्पताल में पहुंच कर एक रात बिताते ही उनकी उस समय मृत्यु हो जाये जब वह स्वयं ही शरीर में आई पोटैशियम की कमी को दूर करने के लिए मुख से और

इन्जेक्शन के माध्यम से पोटैशियम लेना स्वीकार कर लिया हो। हमें पूरी तरह से यह लगता है कि स्वामी सानन्द जी की हत्या हुई है। यह बताया जा रहा है कि उनको दिल का दौरा पडा था। लेकिन यह प्रश्न है कि हृदयाघात के शिकार व्यक्ति को अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया जाता है अथवा एम्बुलेन्स में लादकर कहीं और ले जाया जाता हैं ?

उन्होंने कहा कि यह सरकार यदि यह संदेश देना चाहती है कि जो गंगा की बात करेगा उसकी हत्या हो जाएगी तो हम यह स्पष्ट कह देना चाहते हैं कि इस देश में गंगा के लिए पहले भी हमारे पूर्वजों ने बलिदान किया है और आज भी गंगा भक्त गंगा के लिए कुछ भी कर गुजरने से पीछे नहीं हटने वाले हैं । सानंद जी के चले जाने से गंगा अभियानम् नहीं रुकेगा ।

मांग

  • स्वामी सानन्द जी की शरीर का पोस्टमार्टम हो । क्योंकि हमें शंका है कि उनकी हत्या हुई है।
  • स्वामी सानन्द जी का शरीरं काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को सौपा जाए, क्योंकि उन्होंने हमसे यह कहा था कि मेरे मृत्यु के बाद मेरे शरीर को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान  के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए दिया जाय।
  • सीबीआई से उनकी मृत्यु की परिस्थितियों की जांच कराई जाम।

    बनारस से वरिष्‍ठ पत्रकार हरेंद्र शुक्‍ला की रिपोर्ट.