जनसंख्या दिवस की शुरुआत के तीस साल में बढ़ी 50% आबादी

Population

राज बहादुर सिंह

: मर्ज बढ़ता गया ज्यूं ज्यूं दवा की : आज विश्व जनसंख्या दिवस है। जनसंख्या Population नियंत्रण को लेकर बड़ी बड़ी बातें फिर सुर्खियों में हैं। सच तो यह है कि जब से जनसंख्या (Population) दिवस का आयोजन एक पर्व की तरह होने लगा अपने मंसूबों की जानिब हमारी नाकामी और बढ़ती गयी। अलबत्ता बहस और मुनासिब बहस जारी है इस नाकामी की वजहों और जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं पर और बहस किसी फैसलाकुन नतीजे पर पहुंचने में भी नाकाम हुई है।

बात 1987 की है जब पृथ्वी पर रहने वाली आबादी (Population) पांच अरब यानि पांच सौ करोड़ पहुंच गई। इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और बढ़ती आबादी (Population) के चौतरफा दुष्प्रभावों से जनमानस को जागरूक करने के लिए 11 जुलाई 1989 को पहली बार विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) मनाया गया और तब से यह रस्म अदायगी हर साल की जाती है।

और जागरूकता कितनी आयी है यह जानने के लिए यह जानना ही पर्याप्त है कि आज आबादी (Population) साढ़े सात अरब हो चुकी है। मतलब यह कि बीते 30 साल में जब से जनसंख्या (Population) को लेकर विश्व व्यापी जागरूकता शुरू हुई तब से इसमें 50% की वृद्धि हो चुकी है। यह महज मकसद की नाकामी नहीं है। यह मकसद की बेहद शर्मनाक नाकामी है।

भारत विविधताओं का देश है और यही इसकी विशेषता और महानता है। यह सुनते सुनते पीढियां बदलतीं जा रही हैं लेकिन यह सुनने को कान तरस गए कि नियम, कानून, राष्ट्र हित, और सुरक्षित व समृद्धिशाली भविष्य के लिए विविधताओं को एकरूपता के धागे में पिरोया जाए। कानून जिसमें सुरक्षित भविष्य निहित हो उसके अनुपालन में निजी और पराए का भाव नहीं आने दिया जा सकता।

दुर्भाग्य है कि विविधताओं से भरा देश अपने भविष्य को लेकर भी नियम कानून की विविधताओं में अभिशप्त होकर रह गया है। वोट बैंक ने सुरक्षित भविष्य की फिक्र को एक कोने में धकेल दिया है। सच बोलने से जो डरते हैं वे सच को लागू तो करवा ही नहीं सकते। संसाधन खासकर कुदरती, सिकुड़ते जा रहे हैं और आबादी (Population) सुरसा के मुंह की तरफ फैलती जा रही है और इसमें समाता जा रहा है भविष्य, एक बेहतर भविष्य। और हम जनसंख्या को लेकर जागरूक हो रहे है और जागरूक कर रहे हैं। वाह रे जागरूकता। धन्य है तू।

rbsराज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.