परिश्रम ही आपको अनमोल बनाता है: योगी आदित्यनाथ

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  • महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन के अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने किया सम्बोधित
  • पूर्वी यूपी में शैक्षिक पुनर्जागरण के लिए ब्रह़मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी ने की थी एमपी शिक्षा परिषद की स्थापना
  • हमें पानी बचाने के लिए सोचना होगा, कम से कम पानी का करें प्रयोग: राज्यपाल
  • हमारी शिक्षा और शोध का स्तर विश्वस्तरीय होना चाहिए: राज्यपाल

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। लक्ष्य तय करने के बाद उसे हासिल करने के लिए किया जाने वाला परिश्रम ही हमें अनमोल बनाता है। अपेक्षाकृत पिछड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1932 में ब्रह़मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी ने महाराणा शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। उस समय का पौधा अगर वट वृक्ष बना है तो उसके पीछे इससे जुड़े लोगों की मेहनत है। यहां के बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्रवाद का भी पाठ पढ़ाया जाता है।

मंगलवार को एमपी शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन और पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1932 वह कालखंड था जब ये देश गुलाम था। ऐसे समय में परिषद के जरिए ब्रह़मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी ने इस क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी कोई स्वाभिमानी समाज अपने सम्मान की रक्षा और भावी पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए जागरुक हो जाता है, तो कोई ताकत उस पर बहुत दिनों तक शासन नहीं कर सकती है। आज़ादी मिलना पर्याप्त नहीं, बल्कि आज़ादी के मायनों को जानकर समर्थ और शक्तिशाली भारत का निर्माण हम सबका मकसद है। शिक्षा परिषद की स्थापना के पीछे महंत दिग्विजयनाथ की यही सोच थी।

मुख्यमंत्री ने कहा निजी क्षेत्र में महिलाओं के लिए पहला शिक्षण संसथान बनाने का श्रेय भी एमपी शिक्षा परिषद को ही है। ब्रह़मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी ने ज्ञान के जिस मंदिर की स्थापना की थी उसे पूज्य गुरुदेव ब्रह़मलीन महंत अवेद्यनाथ जी ने और प्रकाशमान किया। यह सिलसिला आज भी जारी है। एमपी शिक्षा परिषद का उद्देश्य शिक्षा के मूल्य उद्देश्यों को प्राप्त करना, शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए अपना योगदान देना, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां शासन की पहुंच नहीं है या अपेक्षाकृत कम पहुंच है। पिछले 25 सालों में कौन संस्था प्रगति के पथ पर अग्रसर है। यकीनन यह सिलसिला जारी रहेगा।

कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा को बच्चों के जीवन के लिए उपयोगी बनाएं। कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई के दौरान अनुशासन और खुद को पहचाने पर जोर होना चाहिए। सेहत ठीक रहे, आपके भोजन, खेल कूद की व्यवस्था, पढ़ाई में रुचि बढ़ाने के लिए क्या होना चाहिए, शिक्षकों को यह सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली सभी लड़कियों का हीमोग्लोबिन टेस्ट होना चाहिए ताकि पता चले कि वो एनिमिक तो नही हैं। लड़कियों के विवाह की चिंता तो होती है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की चिंता किसी को नहीं होती।

उन्होंने कहा कि खेलकूद के लिए अब किसी के पास समय नहीं है। हर किसी को डॉक्टर और इंजीनियर बनने की पड़ी है। ये भी तभी होगा जब आपका स्वास्थ्य ठीक होगा। हम ऐसी शिक्षा प्राप्त करें कि विश्व के किसी भी छात्र-छात्रा से आंख से आंख मिलाकर उनसे बात कर सकें। आज 60 से 80 प्रतिशत तक गोल्ड मेडल लड़कियां प्राप्त करती हैं। आपको पानी बचाने के लिए भी सोचना होगा। करोड़ों बच्चों को दो समय का भोजन नहीं मिलता है, ऐसे में आप भोजन को बर्बाद मत करिए। अच्छी या बुरी आदत छोटी उम्र से ही होती है, ऐसे में बच्चों में शुरू से ही अच्छे संस्कार डालना होगा।