लालजी टंडन के निधन के बाद कार्यकर्ताओं उम्‍मीद बन रहे हैं राजीव मिश्रा

: सुबह से घर पर लग जाती है फरियादियों की भीड़ : लखनऊ : भाजपा नेता लालजी टंडन राजधानी की ऐसी शख्‍शियत थे, जहां प्रदेश भर के लोग अपनी समस्‍याओं का समाधान कराने पहुंचते थे। कार्यकर्ता अपनी परेशानियां बताने पहुंचते थे। टंडनजी सबकी परेशानी सुनते थे, और उसका समाधान भी कराते थे। रालोद कार्यालय के बगल में मौजूद बंगला नंबर 9 का गेट हमेशा फरियादियों के लिये खुला रहता था। यह गेट तभी बंद होता था, जब लालजी टंडन यहां मौजूद नहीं होते थे।

लालजी टंडन के जाने के गोलोकवासी होने के बाद राजधानी में उस वैक्‍यूम को भरना बहुत मुश्किल काम है। खासकर भाजपा के लिये, जिसके पास ऐसा कोई दिग्‍गज नहीं है, जो लालजी टंडन की तरह कार्यकर्ताओं की बात धैर्य से सुने और समाधान कराये। खुद उनके पुत्र आशुतोष टंडन गोपालजी में इतना धैर्य और सयंम नहीं है कि वह कार्यकर्ताओं की सुनें और समस्‍याओं का समाधान करायें। बंगला नंबर 9 को जो गेट कभी बंद नहीं होता था, लालजी टंडन के निधन के बाद अब खुलता ही नहीं है।

कहने के लिये तो भाजपा में उपमुख्‍यमंत्री डा. दिनेश शर्मा, जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह, मंत्री स्‍वाति सिंह, कानून मंत्री डा. बृजेश पाठक लखनऊ के नेता हैं, लेकिन इनमें दो तो इतने ईमानदार हैं कि कार्यकर्ताओं के किसी काम के नहीं हैं। डा. शर्मा और डा. सिंह अपनी समस्‍या लेकर आये कार्यकर्ताओं को ईमानदारी का इतना पाठ पढ़ाते हैं कि हताश कार्यकर्ता फिर उधर का रूख नहीं करता। ये कार्यकर्ताओं को ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं, और कार्यकर्ता इनका ओढ़ने वाला वो कंबल देखता है, जो घी पीने के समय काम आता है।

कुछ हद तक बृजेश पाठक कार्यकर्ताओं की समस्‍याओं को सुनकर समाधान की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके मूल भाजपाई ना होने से पार्टी का कार्यकर्ता उधर का रूख नहीं करता। लालजी टंडन के स्‍थान को भरना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन उस परिपाटी को अब राजधानी में आगे बढ़ाने का काम भाजपा अवध क्षेत्र के उपाध्‍यक्ष राजीव मिश्रा कर रहे हैं। अपने मधुर व्‍यवहार के लिये पहचाने जाने वाले राजीव के घर पर हर सुबह जुटने वाली भीड़ खुद इसकी कहानी कहती है।

 

प्रतिदिन सुबह लखनऊ के किसी भी मंत्री के घर से ज्‍यादा भीड़ राजीव मिश्रा के दरवाजे पर जुटती है। इसमें कार्यकर्ता भी शामिल होते हैं और आम नागरिक भी। राजीव तमाम व्‍यवस्‍तताओं के बावजूद इनकी बात धैर्य से सुनते हैं और यथासंभव उनका समाधान भी कराते हैं बिल्‍कुल लालजी टंडन की तरह। उनके घर के दरवाजे कार्यकर्ताओं और फरियादियों के लिये हमेशा खुले रहते हैं। अपने सरल और सहज व्‍यवहार से वह कार्यकर्ताओं का दिल लगातार जीत रहे हैं।

राजीव केवल राजनीति में ही सक्रिय नहीं हैं बल्कि वह समाज सेवा के कार्यों में भी उतने ही सक्रिय हैं। अपनी पत्‍नी के नाम पर बनाये गये ममता चैरिटेबल ट्रस्‍ट के जरिये वह हर साल कई हजार कंबल का वितरण करते हैं। प्‍याऊ लगवाते हैं। भंडारा करते हैं। भूखों को खाना खिलाते हैं। राजीव को अगर भविष्‍य का लालजी टंडन कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्‍योंकि कार्यकर्ताओं की बात धैर्य से सुनने वाले नेता अब लुप्‍त होते जा रहे हैं। जो नेता बचे हैं वो कंबल ओढ़कर घी पीने वाले  ईमानदार है या फिर लूट में व्‍यस्‍त रहने वाले बेईमान।