इस गांव को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कितना विकास हुआ है

गली

अनिल सिंह

: अब तक बदहाल है गोद लिया गया गांव : चार में ओडीएफ नहीं हो पाया जरखोर : कहते हैं कि एक चावल देखकर पूरे पतीली का अंदाजा लगाया जा सकता है। मोदी सरकार और उनके सांसदों ने जनता के हित में कितना बड़ा काम किया, इसकी बानगी गोद लिए गांव को देखकर किया जा सकता है। भाजपा के  प्रदेश  अध्‍यक्ष एवं चंदौली सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय के गोद लिए गए गांव की हकीकत इनकी कार्यशैली और मोदी सरकार की उपलब्धियों का जीता-जागता नमूना है। अपनी लेटलतीफी और मंच पर सोने के लिए कुख्‍यात डा. पांडेय जनता का कितना भला कर पाए हैं, इसका सबूत गोद लिया गया गांव जरखोर हैं, जो अब तक ओडीएफ तक घोषित नहीं हो पाया है।

भाजपाध्‍यक्ष की गोद में रोता गांव

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार के 26 जून को चार साल पूरे हो गए। मोदी सरकार के मंत्री और संगठन के लोग मोदी सरकार की उपलब्धियों बताने के लिए जगह-जगह पत्रकार वार्ता करके कसीदे पढ़े जा रहे हैं। भाजपा मुख्‍यालय में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष डा. महेंद्रनाथ पांडेय मोदी सरकार के कामों का ढिंढोरा पीट रहे थे। पत्रकारों ने जब गोद लिए गांवों के बारे में पूछना शुरू किया तो दोनों नेता बगले झांकने लगे। अब आइए हम दिखाते हैं प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष एवं चंदौली के सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय केगोद लिए गए पहले गांव जरखोर का हाल। लगभग 32 सौ आबादी वाले इस गांव को डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद गोद लिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सभी सांसदों से कहा था कि वह पांच साल में कम से कम तीन गांवों को गोद लेकर उनमें मूलभूत सुविधाओं का विस्‍तार करें। पीएम मोदी ने गोद लिए गए गांव के प्रत्‍येक हर घर में शौचालय, हर घर में शुद्ध पानी, साफ-सफाई की व्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त करने का आह्वान किया था। चंदौली के सांसद डा. पांडेय ने जरखोर को गोद तो ले लिया, लेकिन अपनी लेट-लतीफी वाली आदत की तरह ही अब तक इस गांव का अब तक विकास नहीं कराए पाए। जनता को धोखा देने की नीयत से दूसरा गांव भी गोद लेलिया, जबकि पहले ही गांव में सुविधाओं की मुक्‍कमल व्‍यवस्‍था नहीं करा सके।

गांव की उखड़ी गलियां, गलियों में भरा नाबदान का पानी डा. महेंद्रनाथ पांडेय की कार्यक्षमता का बखान खुद करता दिखता है। लगभग 2 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से तैयार पेयजल योजना के जरिएगांव के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्‍ध कराया जाना था, लेकिन मोदी सरकार के चार साल और योगी सरकार के एक साल बीत जाने के बावजूद जरखोर गांव के लोगों को पानी नहीं मिल सका। अभी भी यह पेयजल योजना प्रारंभ नहीं हो सकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को भोजन-रोजगार से ज्‍यादा शौचालय देने में अपनी ऊर्जा लगाई, लेकिन उनके सांसद जी के गोद लिए गांव में 30 मई तक शौचालय पूर्ण नहीं हो सके हैं।

पानी टंकी

डा. महेंद्रनाथ पांडेय के गोद लिए जाने के बावजूद गांव बदहाली से जूझ रहा है। चयन 4 वर्ष बाद भी गोद लेने की औपचारिकता के अलावा कोई विकास कार्य नहीं किया है, जिससे गांव के लोगों में भी नाराजगी है। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में चंदौली से सांसद निवार्चित होने के बाद केंद्र में राज्‍यमंत्री तथा वर्तमान में प्रदेश अध्‍यक्ष पद पर काबिज डा. महेंद्रनाथ पांडेय ने लाटरी सिस्‍टम के तहत गोद लिया था तथा विकास के लंबे-चौड़े वायदे किए थे। सांसद ने  गांव को गोद लेने के बाद गरीबों के लिए पक्का मकान, गरीबों को पेंशन, कन्या विद्यालय, पक्की नाली,  सड़क, अस्पताल,  पानी की टंकी, शौचालय और तालाब के सौंदर्यीकरण का वादा किया था, लेकिन समय बीतने के साथ ही इन वायदों पर धूल की लंबी परत जमती चली गई।

दलित बस्‍ती के लोग विकास में भी भेदभाव का आरोप लगाने से नहीं चूकते हैं। उनका कहना है कि गांव के एक हिस्‍से में चकाचक रौशनी है, ऊजाला है, लेकिन दलित बस्‍ती में हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। गांव गोद लिए जाने के बावजूद दलित बस्‍ती में अब तक सड़क और नाली के पानी की निकासी की व्‍यवस्‍था नहीं हो पाई है। गांव वाले आरोप लगाते हैं कि पिछले चार साल में विकास कम मुआयना ज्‍यादा हुआ है। बुनियादी जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो पाई हैं।

जरखोर के ग्राम प्रधान बताते हैं कि पेयजल योजना लगभग पूरी हो गई है, जल्‍द ही आपूर्ति भी शुरू होने की उम्‍मीद है। वह बताते हैं कि सांसद ने बीस सोलर लाइट तथा दस हैंडपंप गांव को दिए हैं। एक करोड़ 59 लाख की लागत से सीवर एवं अन्‍य योजनाओं का प्रोजेक्‍ट भेजा गया है। संभावना है कि जल्‍द ही इस पर काम शुरू हो जाए। इसके अलावा उन्‍होंने गांव के तालाब के एक किनारे के घाट का काम भी अपनी निधि से कराया है। गांव के ओडीएफ होने के सवाल पर ग्राम प्रधान बताते हैं कि अगले महीने तक गांव ओडीएफ हो जाएगा। हालांकि यह आसानी से समझा जा सकता है कि चार साल बीतने के बावजूद सांसद जी कागोद लिया गांव ओडीएफ नहीं हो पाया है।

दरअसल, लेट-लतीफी के लिए बदनाम डा. महेंद्रनाथ पांडेय विकास कार्यों में भी लगातार लेट चल रहे हैं। डा. पांडेय ने जिले में ऐसा कोई काम नहीं कराया है, जिससे लगे कि वह विकास को लेकर संवेदनशील हैं। चंदौली मुख्‍यालय पर जिस आरओबी को लेकर वह दावे ठोंकते हैं, उसको सपा के पूर्व सांसद राम किशुन अपने प्रयास से धरातल पर उतार चुके थे, लेकिन केंद्र और राज्‍य में अलग-अलग सरकार होने की वजह से इस पर काम शुरू नहीं हो पाया। जब उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ की सरकार आ गई तो लोगों की परेशानियों को देखते हुए सीएम ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए हरी झंडी दिखा दी, जिसका केवल श्रेय डा. महेंद्रनाथ पांडेय लेने में परेशान हैं।

मोदी लहर में चंदौली से जीतने वाले डा. महेंद्रनाथ से बुरी तरह नाराज है। मुगलसराय निवासी समाजसेवी एवं पत्रकार राजीव गुप्‍ता कहते हैं, ”सांसद जी किसी भी कार्यक्रम में टाइम से आ जाएं तो यह गिनिज बुक में दर्ज करने वाला रिकार्ड बन सकता है।” राजीव एक अनुभव बताते हैं, ”राममंदिर में एक मठ का उद्घाटन करना था। सांसदजी ने दस बजे का समय दिया था, लेकिन दस बजे की बजाय वह साढ़े तीन बजे शाम को आए। तब तक लोग जा चुके थे। आयोजक भी सांसद को बुलाकर दुखी थे।” ऐसी स्थिति में समझा जा सकता है कि एक लेटलतीफ सांसद से क्षेत्र की जनता कितनी खुश होगी? इस संदर्भ में जब सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय के फोन पर काल किया गया तो उन्‍होंने फोन रिसीव नहीं किया।

मंच पर सोने के शौकीन 

भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष एवं सांसद डा. महेंद्रनाथ पांडेय केवल अपनी लेटलतीफी के लिए ही कुख्‍यात नहीं हैं बल्कि मंच पर सोने के लिए भी बदनाम हैं। कई बार वह मंच पर सोते पाए जाते हैं। सोमवार 29 मई को गृहमंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मोदी सरकार के चार साल के कामों का कसीदा काढ़ रहे थे। प्रदेश अध्‍यक्ष होने के नाते डा. महेंद्रनाथ पांडेय भी मंच पर बैठे हुए थे। राजनाथ सिंह पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे तथा योगी जी बीच में बैठे थे। योगी जी के ठीक बगल में बैठे डा. महेंद्रनाथ पांडेय नींद में गोते लगा रहे थे। डा. पांडेय इसके पहले भी 26 मई को भाजपा मुख्‍यालय पर सीएम योगी की मोदी की उपलब्धियां गिनाने वाले प्रेस कांफ्रेस में सोते नजर आए थे।

वरिष्‍ठ पत्रकार डा. अशोक कहते हैं, ”मोदी सरकार की उपलब्धियां तो जैसे लोरी हो गईं हैं, जिसको सुनकर अक्‍सर डा. महेंद्रनाथ पांडेय सोने लग जाते हैं।” दरअसल, अपनी लुंजपुंज कार्यप्रणाली तथा जनता से कटे रहने के चलते डा. महेंद्रनाथ पांडेय कई बार जमानत जब्‍त करा चुके हैं। अब यह अलग बात है कि पार्टी को उनमें पता नहीं कौन सी खूबी नजर आती है, जो इनके जैसे लेटलतीफ और लुंजपुंज व्‍यक्ति को प्रदेश अध्‍यक्ष जैसे महत्‍वपूर्ण पद का दायित्‍व दे रखा है। इनके पहले अध्‍यक्ष रहे केशव मौर्य हों या फिर डा. लक्ष्‍मीकांत बाजपेयी, यह लोग कभी मंच पर सोते नहीं देखे गए। और कार्यकर्ताओं का फोन उठाने से भी कभी परहेज नहीं किया।