अपना गांव बचाने उतरे ग्रामीण, पूर्व सांसद का मिला साथ

एसबी यादव

: रामकिशुन के नेतृत्व में शुक्रवार को पदयात्रा निकाली : चंदौली। विकासखण्ड के जफरपुर गांव से होकर जाने वाली प्रस्तावित रेलवे लाईन के विरोध में ग्रामीणों ने पूर्व सांसद रामकिशुन के नेतृत्व में शुक्रवार को पदयात्रा निकाली, जो जफरपुर गांव से शुरू होकर डिहवा, एकौनी, कमलापुर, हथेरवा, खजुरगाव, हृदयपुर होते हुए व्यासनगर जाकर समाप्त हुआ। ग्रामीण रेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

इस दौरान पूर्व सांसद रामकिशुन ने कहा कि जफरपुर गांव के लोगों की जमीन पहले ही फ्रेट कॉरिडोर,  औद्योगिक क्षेत्र,  नेशनल हाईवे आदि के लिए ली जा चुकी है। अब गांव को ही सरकार उजाड़ना चाहती है। कहा कि रेल लाइन बिछाने के लिए जिन किसानों की जमीन व मकान अधिग्रहित किया जा रहा है, सबसे पहले उनके पुनर्वास के लिए रेल प्रशासन व्यवस्था करे।

उन्‍होंने कहा कि रेल प्रशासन को किसानों द्वारा दिए जा रहे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। इसके उपरांत ही आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। रेलवे के पास खुद की बेकार पड़ी हुई जमीन जफरपुर गांव से व्यासनगर रेलवे स्टेशन तक है। इसके बावजूद जफरपुर, डिहवा, एकौनी, खजूरगांव आदि गांव के किसानों को उजाड़ा जा रहा है। इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पदयात्रा व्यासनगर तक गई, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों किसान व ग्रामीण जुड़ते गए। पदयात्रा में पूर्व प्रमुख बाबूलाल यादव, प्रेमनाथ तिवारी, मुलायम सिंह यादव, चंद्रजीत बबलू, रमेश प्रजापति, मंगल सिंह, कमलेश यादव, राममूरत, गंगाराम यादव, पप्पू सिंह, उदय नारायण, वीरेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीनारायण, बाबूनन्दन, घासी, श्यामसुंदर चौहान, बृजेश सिंह आदि शामिल रहे।

सत्तापक्ष से नहीं मिली मदद

जफरपुर गांव के किसान प्रस्तावित रेलवे लाइन से गाँव को बचाने के लिए सबसे पहले बीते वर्ष 29 दिसम्बर को क्षेत्रीय विधायक साधना सिंह से उनके आवास पर मिलकर समस्या से अवगत कराया था, जिन्होंने तत्काल जिलाधिकारी से किसानों को मिलवाया लेकिन परिणाम शून्य रहा। ततपश्चात बीते 26 जनवरी को ग्रामीण सांसद व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय से भी गुहार लगाया फिर भी कोई परिणाम नहीं निकला। सत्तापक्ष से मदद न मिलने पर ग्रामीण आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं। जिन्हें विपक्षी पार्टी का समर्थन मिला है।

फेज टू के लिए अधिग्रहण के दौरान हुई थी फायरिंग

जमीन बचाने के लिए जफरपुर गांव के किसानों ने 2003 में भी जिला प्रशासन से लड़ाई लड़ी थी, जिसमें पुलिस फायरिंग में ग्रामीण भी घायल हुए थे। वहीं तत्कालीन विधायक पूर्व सांसद रामकिशुन भी चोटिल हुए थे। औद्योगिक क्षेत्र फेज दो के लिए यूपीएसआईडीसी की ओर से 144 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए 2001 में नोटिफिकेशन जारी हुआ था।

जब 7 अगस्त 2003 को भूमि अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन के साथ यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों की टीम पहुंची तो तत्कालीन विधायक रामकिशुन के नेतृत्व में ग्रामीण प्रशासन से भिड़ गए। स्थिति ये हो गई कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। जिसमें कुछ ग्रामीण व विधायक रामकिशुन भी घायल हुए थे।

औद्योगिक क्षेत्र फेज तीन के लिए भी ली जा रही है जमीन

औद्योगिक क्षेत्र फेज टू के लिए पूर्व में ली गई 144 एकड़ जमीन के बाद यूपीएसआईडीसी लंका रोड व हाइवे के बीच करीब 79 एकड़ जमीन फेज तीन के लिए अधिग्रहित कर रहा है, जिसके खिलाफ अभी जफरपुर के ग्रामीण लड़ ही रहे थे कि रेलवे लाइन का मामला उनके समक्ष आ गया। जिसके लिए ग्रामीण आंदोलन की राह अपना लिए हैं।