भारत को समझना है तो संस्कृत को समझना जरूरी : मुख्यमंत्री

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि भारत को समझना है तो संस्कृत को समझना जरूरी है। भारतीय संस्कृति की महत्ता को संस्कृत के माध्यम से ही जाना जा सकता है। इस भाषा ने जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा में बड़ी भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम हो सकती है। संस्कृत देव भाषा है, इसका साहित्य अत्यन्त समृद्ध है। अपने साहित्य के माध्यम से संस्कृत भाषा आज भी सुरक्षित है।

मुख्यमंत्री जी ने यह विचार आज यहां विश्वैश्वरैया प्रेक्षागृह में उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित प्रथमा, पूर्व मध्यमा एवं उच्चतर मध्यमा की वर्ष 2018 की परीक्षा के मेधावियों के सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के सकारात्मक रुख के कारण ही माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का गठन किया जा सका है, ताकि परीक्षाएं समय पर सम्पन्न हों तथा इनके परिणाम भी समय पर आ सकें। यह पहला अवसर है, जब आजादी के बाद संस्कृत के प्रथमा, पूर्व मध्यमा एवं उच्चतर मध्यमा के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की परम्परा जड़ता की नहीं रही है, बल्कि जहां जो अच्छा मिला, उसे अंगीकार किया। हमारा पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए, जिसमें संस्कृत का आधुनिकता व पुरातन के साथ सामंजस्य स्थापित हो सके, जिससे शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाते हुए विद्यार्थियों का भविष्य भी बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि दुनिया मान रही है कि संस्कृत ही कम्प्यूटर की सबसे सुगम भाषा हो सकती है। आज संस्कृत को विज्ञान एवं गणित से जोड़ने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा में बदलाव लाने का काम किया है। पूर्ववर्ती सरकारों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नकल माफियाओं का केन्द्र बन चुका था। वर्तमान सरकार न केवल नकलविहीन परीक्षा कराने में सफल रही, बल्कि हाईस्कूल व इण्टर के परीक्षाफल भी एक ही दिन में घोषित कराने का काम किया गया। समय को देखते हुए यू0पी0 बोर्ड भी अपने पाठ्यक्रम को एन0सी0ई0आर0टी0 की तर्ज पर बनाने का काम कर रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को भी अखिल भारतीय प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकें।

मुख्यमंत्री जी ने राज्य स्तर पर प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को 01-01 लाख रुपए की धनराशि का चेक, टैबलेट, प्रशस्ति पत्र एवं मेडल तथा 04 से 10 तक स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को 21 हजार रुपए की धनराशि का चेक, टैबलेट, प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेशभर से आए हुए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कुल 40 मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ-साथ राज्य स्तर के प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार मेधा को सम्मान देने का कार्य कर रही है। संस्कृत के उन्नयन के लिए आवश्यक है कि इसको आधुनिकता से जोड़ा जाए। इसीलिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के विद्यार्थियों की मार्कशीट वेबसाइट पर भी उपलब्ध करायी गयी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए निर्णय लिया है कि शैक्षिक कैलेण्डर 220 दिन का होगा, जिसमें 200 दिन पढ़ाई के लिए और 20 दिन रिवीजन के लिए होंगे। धन्यवाद ज्ञापन माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री श्री संदीप सिंह ने किया।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने नवनिर्मित 18 बालिका छात्रावास, 19 राजकीय हाईस्कूल एवं 16 राजकीय इण्टर काॅलेज भवनों का लोकार्पण किया। ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत नवीन राजकीय हाईस्कूलों की स्थापना असेवित क्षेत्रों में करायी गयी है, जिनके भवन निर्माण हेतु प्रति विद्यालय 69.51 लाख रुपए स्वीकृत हैं। इसी प्रकार अपवंचित वर्ग की छात्राओं के लिए बालिका छात्रावास का निर्माण कराया गया है, जिनके भवन निर्माण की इकाई लागत 170.25 लाख रुपए है। शैक्षिक रूप से पिछड़े विकास खण्डों में पं0 दीन दयाल उपाध्याय राजकीय माॅडल इण्टर काॅलेज की स्थापना की गयी है। इनके भवन निर्माण की इकाई लागत 302 लाख रुपए है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा श्री संजय अग्रवाल, सचिव माध्यमिक शिक्षा श्रीमती संध्या तिवारी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान श्री वाचस्पति मिश्र सहित जनप्रतिनिधिगण, विद्यार्थियों के अभिभावक सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।