‘शर्माजी को रिप्‍लेस करेंगे शर्माजी’ की उड़ती खबर से मिश्राजी परेशान, जिनकी फीस फंसी है

अनिल सिंह

शर्माजी आज के दिन ही पैदा हुए थे. शर्माजी के पैदा होने की सबसे कम खुशी उनके उन समर्थकों में थी, जिनके वो कभी कभार भूले बिसरे काम आ जाते थे. शर्माजी के वो समर्थक भी जबरी खुश दिखने की कोशिश कर रहे थे, जो मानते थे कि शर्माजी किसी काम के नहीं हैं. और शर्माजी बिल्‍ली के पॉट्टी हैं, जो ना लिपने के काम आते हैं ना पोतने के, और इससे गोंइठा तो बन ही नहीं सकता, लेकिन फिर भी शर्माजी की पार्टी पता नहीं क्‍यों गोंइठा में घी सुखाने पर बीते चार-पांच साल से जुटी हुई थी. शर्माजी अच्‍छे भले आदमी में थे, लेकिन रीढ़ की हड्डी में तकलीफ होने के चलते वह कहीं भी तनकर खड़े नहीं हो पाते थे, इसलिये उन्‍हें हमेशा कुर्सी मिलती थी.

इधर, माहौल की खुशी भांपते हुए शर्माजी बीच-बीच में अपनी ईमानदारी के तमाम ऐसे किस्‍से सुना रहे थे, जो उनके अलावा उन्‍हीं को पता था. कुछ समर्थक वाह कर रहे थे, कुछ आह कर रहे थे. शर्माजी की राजनीतिक पार्टी में भी यही खूबी थी कि वहां सब ईमानदार ही होते हैं. बेईमानों के लिये तो यहां कोई जगह ही नहीं थी. इस पार्टी के लोग कमीशन भी पूरी ईमानदारी से लेते थे. बेईमानों और बेईमानी के लिये तो वहां कोई जगह थी ही नहीं. इस पार्टी के ज्‍यादातर लोगों के पास महंगे कपड़े तक नहीं होते हैं. ठंड या किसी भी चीज से बचने के लिये यह लोग कंबल ही रखते हैं. और जब भी कहीं से घी-दूध हाथ लगता, कंबल ओढ़कर पी लेते हैं.

खैर, शर्माजी का जन्‍मदिन पूरे हर्षोउल्‍लास के साथ मनाया ही जा रहा था कि अचानक इसे नजर लग गई. खबरें तैरने लगीं कि एक और शर्माजी इस वाले शर्माजी को रिप्‍लेस कर देंगे. अब ई वाले शर्माजी, ऊ वाले शर्माजी को लेकर टेंशन में आ गये. यहां वहां फोनियाने लगे. इस खबर से तीन समर्थक दुखी हुए, लेकिन 317 समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. पर यह खबर सुनकर इन दोनों से ज्‍यादा टेंशन में अपने मिश्राजी आ गये, जिनके दो करोड़ फंसने के आसार बन गये. उनके सपने मुरझाने लगे. बेईमान पार्टी से ईमानदार पार्टी में आये मिश्राजी ने ईमानदारी सर्टिफिकेट पाने की फीस तो चुकाई ही थी, जीतने के बाद लाल-काला बत्‍ती का वाहन पाने की आस में भी फीस भरी थी.

इसी फीस को लेकर मिश्राजी टेंशना गये, क्‍योंकि उन्‍होंने यह फीस ना तो ऑनलाइन भरी थी, और ना ही चेक या ड्राफ्ट से दिया था. यहां तक कि सरकार के इतना कहने के बाद भी गूगल पे या पेटीएम से भी यह फीस नहीं दिया था. अब केंद्र वाली सरकार की बात ना मानने का नतीजा यह रहा कि वह मैनेजर साहब से दो करोड़ की फीस वापस भी नहीं मांग सकते हैं, क्‍योंकि मैनेजर साहब नाराज हो गये तो 2022 की कक्षा में प्रवेश लेने से पहले ही टीसी पकड़ा देंगे. अब शर्माजी तो शर्माजी उनसे ज्‍यादा अपने मिश्राजी दुखी हैं कि कहीं होटल बिकने की नौबत ना आ जाये फीस फंसने के चलते. अब देखते हैं कि मैनेजर साहब कैसे मिश्राजी को प्रोफेसरी में सेट करते हैं, क्‍योंकि प्रिंसिपल साहब तो सचमुच वाले ईमानदार हैं.