छलका शिवपाल का दर्द, कहा-जिसे बेटे से ज्यादा माना, उसने ही अपमानित किया

नरेन्द्र श्रीवास्तव

लखनऊ। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के गठन के बाद शिवपाल यादव जहां अपनी नई राजनीतिक पारी खेलने को तैयार हैं वहीं रिश्तों में आयी खटास से वह अभी भी खुद को आहत महसूस कर रहे हैं। उनसे बातचीत में ये साफ तौर पर झलकता है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और अपने भतीजे अखिलेश यादव का नाम लिये बगैर वह कहते हैं कि जिसे पाला पोषा,पढ़ा लिखाकर बड़ा किया, शादी कराई उसने ही बेइन्तिहा अपमानित किया।

शिवपाल ने  कहा कि कभी सोचा नहीं था कि मेरे साथ भी ऐसा होगा। वह बात करते-करते पुरानी यादों में खो गए। भावुक शिवपाल इसी बीच अखिलेश यादव की बचपन की बातें करने लगे। उन्होंने कहा कि नेताजी राजनीति में व्यस्त रहते थे। उनके पास समय नहीं रहता था, ऐसे में भतीजे के पालन पोषण की जिम्मेदारी वह अपनी पत्नी के साथ निभाते थे।

उन्होंने कहा कि अन्य भतीजे,भतीजियों की भी शादी विवाह करवाई। नेताजी जो जिम्मेदारी दे देते थे, उसे निभाना हमारा पहला कर्तव्य होता था। परिवार की शादियों में जेवर, बर्तन से लेकर अन्य सभी सामानों की खरीददारी और व्यवस्था करना उनका कर्तव्य होता था।

समय बदला, जिन भतीजों को अपने बेटे से ज्यादा प्यार किया आज वही उनके सामने खड़े हो गये हैं। झिड़क रहे हैं। बड़ों को सम्मान देने की संस्कृति ताक पर रख दी गयी है। नेताजी की भी नहीं सुन रहे हैं। पूरा देश जानता है कि सपा और सैफई परिवार में जो कुछ भी है वह नेताजी की देन है।

उन्होंने बताया कि नेताजी की बात उनके लिये ईश वचन होती थी। नेताजी ज्यादातर बाहर रहते थे। आने पर उन्हें कपड़े धुले और प्रेस किये हुये मिलते थे। कई बार तो वह अपने हाथ से उनके कुर्ते और धोतियां धुल दिया करते थे। जाते समय वह जो कह जाते थे उसे पूरा करना अपना धर्म समझता था। अब वह भी बेबस हैं।

बकौल शिवपाल सपा को इस मुकाम तक पहुंचाने में उन्होंने नेताजी के कन्धे से कन्धा मिलाकर मेहनत की है। लेकिन, अब अपमान का आलम यहां तक पहुंच गया था कि उन्हें पार्टी की बैठकों की सूचना तक नहीं दी जाती थी। सपा में अब चापलूसों और आधारविहीन लोगों की पौ बारह है।

पार्टी में लगातार हो रही अपनी अनदेखी का जिक्र करते हुए शिवपाल ने बताया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा विधायकों को एक होटल में दावत दी गयी थी। वह भी न्योते का इन्तजार कर रहे थे, लेकिन बुलावा नहीं आने पर वह इटावा चले गये। दोपहर दो बजे के बाद अखिलेश का फोन आया। पार्टी हित में मैने दूर की सोची और उल्टे पांव लखनऊ वापस आ गया। शिवपाल का कहना है कि तमाम झिड़कियों और अपमान के बावजूद वह अलग नहीं होना चाहते थे, लेकिन सहने की भी एक सीमा होती है। इसलिए समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन बहुत मजबूरी में किया है। उन्होंने कहा कि कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी करना पड़ेगा। लेकिन, गठन कर लिया है तो अब कदम पीछे नहीं करूंगा।

उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सभी 80 सीटों पर मोर्चे के उम्मीदवार खड़े किये जाएंगे। नेताजी भी मोर्चे के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने बताया कि मेरठ,फैजाबाद और इटावा में उनकी रैलियां हो गयी हैं। जल्द ही शेष मंडलों में रैली आयोजित की जाएगी। उसके बाद सभी 75 जिलों में बड़ी जनसभायें करेंगे।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मोर्चा किसी को हराने या जिताने के लिये चुनाव मैदान में नहीं आएगा, बल्कि अपना राजनीतिक कद बढ़ाते हुये जीत के लिये चुनाव लड़ेगा।

उन्होंने बताया कि वैसे तो वह सर्वसमाज को मोर्चे से जोड़ रहे हैं, लेकिन उनका फोकस पिछड़ों और मुसलमानों पर ज्यादा है। उन्होंने दावा किया कि मोर्चे में अभी तक 22 छोटे और मझोले दल शामिल हो चुके हैं। कई जातियों के संगठन भी शामिल हो रहे हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। शिवपाल ने बातचीत में यह भी दावा किया कि मोर्चे के गठन से पहले और बाद में भी नेताजी से कई बार मुलाकात हुई है। नेताजी का आर्शीवाद उनके साथ है।

लेखक नरेंद्र श्रीवास्‍तव उत्‍तर प्रदेश के जानेमाने वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.