श्रीमद्भागवत पुराण कथा में भगवान स्वयं पधारते हैं :- श्री श्री अखिलानंद जी महाराज

7 दिवसीय भागवत कथा प्रारम्भ : पीडीडीयू नगर : स्थानीय आर्य समाज मंदिर के पीछे एक भवन में संस्कृति संजीवनी श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन बुधवार को प्रारंभ हुआ। जिसके तहत सायं 3 से 7 बजे तक 7 दिवसीय भागवत कथा का आयोजन भी किया गया है।

कथा के प्रथम दिवस पर कथा श्रवण कराते हुये श्री श्री अखिलानंद जी महाराज ने कहा कि जहां भगवान की कथा होती है और जहां भक्त कथा श्रवण करते हैं वहां भगवान पधारते हैं।

जो भगवान के चरणों में अपने को समर्पित कर रखा है उसके ऊपर कलि का प्रभाव नहीं पड़ता। भक्ति को धन से प्राप्त नहीं किया जा सकता।भक्ति को भाव से ही प्राप्त किया जा सकता है।

ज्ञान यज्ञ के द्वारा ही ज्ञान और वैराग्य की स्थापना होती है। श्रीमद भागवत पुराण कथा में भगवान स्वयं विराजते हैं । यह एक ऐसा कल्पवृक्ष है जिसमें जो फल लगता है उसका फल अत्यधिक मीठा है।

क्योंकि शुकदेव के द्वारा उस फल को चखा जाता है। कहा जाता है कि कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर जो मन में विचार आ जाता है वह पूरा हो जाता है। मनुष्य की इच्छाएं अनंत होतीं हैं।

वह सबकुछ पाना चाहता है। लेकिन श्रीमद्भागवत रूपी कल्पवृक्ष भक्ति और मुक्ति दोनों देता है। भागवत तो जीते जी भक्तों को मुक्त कर देता है। लेकिन जो रसिक भक्त हैं उसी को भगवान की भक्ति मिलती है। इसलिए भगवान की प्राप्ति करनी है तो भाव के साथ कथा श्रवण करना चाहिये।