… और अटलजी की जनसभा के बावजूद शिव प्रताप शुक्‍ल हार गए थे

राजीव श्रीवास्‍तव

: योगी आदित्‍यनाथ ने गोखरपुर में डा. राधा मोहन को जिताकर दिखाई थी अपनी ताकत : लखनऊ : आज श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी पर कई संस्मरणों में एक संस्मरण वरिष्ठ पत्रकार भाई राजीव ओझा का पढ़ा। तो सोचा कि इसके पहले का संस्मरण, जिसका सौभाग्यवश मैं साक्षी बना, भी प्रस्तुत करूँ। गोरखनाथ मंदिर जाने की इच्छा व्यक्त करने के पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी महाराजगंज ज़िले में आठ संसदीय क्षेत्रों की चुनावी सभा संबोधित करने गए थे।

चूँकि चुनावी सभा आठ संसदीय क्षेत्रों की थी, लिहाज़ा सभी प्रत्याशियों ने भीड़ जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन उस भीड़ में सबसे अधिक समर्थन यदि किसी को मिल रहा था तो वो थे तत्कालीन गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी एवं दो बार के सांसद योगी आदित्यनाथ। चूँकि मैं एक साल से गोरखपुर में बतौर हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार के रूप में मैं पोस्टेड था, मैं गोरक्ष पीठ के प्रति उस क्षेत्र में लोगों के मन में अपार श्रद्धा से पूरी तरह वाक़िफ़ था।

शायद इसीलिए हैरानी इस बात की नहीं थी कि योगी को इतना समर्थन मिल रहा था, परंतु इस बात की कि वाजपेयी जैसे बड़े नेता भी श्रद्धा और भक्ति के आगे निमित्त मात्र हैं। बताते चलें कि 2002 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की ताक़त को दिखाते हुए भाजपा से बग़ावत करके डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल को विधायक के रूप में जीत दिलवाई थी।

भाजपा के तत्कालीन अधिकृत प्रत्याशी शिव प्रताप शुक्ल चुनाव हार गए थे। वो भी जब अटल बिहारी वाजपेयी ने शिव प्रताप के समर्थन में जनसभा भी की थी।  ख़ैर महाराजगंज की रैली में जब योगी आदित्यनाथ मंच पर भाषण देने के लिए उठे तो एक लंबे समय तक वो तालियों की गड़गड़ाहट और पूर्वांचल में रहना है तो योगी योगी कहना है, जैसे नारों की गूंज के कारण बोलना नहीं शुरू कर पाए।

मंच पर अटल बिहारी और राजनाथ सिंह बैठे थे। वाजपेयी का ना सिर्फ़ व्यक्तित्व विराट था बल्कि वो एक मंझे हुए राजनैतिक भी थे, शायद इसी कारण से उन्होंने मौक़े की नजाकत को पूरी तरह से भाँप लिया। जब भाषण देने की उनकी बारी आयी तो उन्होंने दूसरी पंक्ति में बैठे योगी आदित्यनाथ को माइक के निकट बुलाया उनका हाथ थामा और माइक पर बोले- “एक बार मेरे साथ बोलिए पूर्वांचल में रहना है तो… “ और वाजपेयीजी अपने चिर परिचित अंदाज़ में उतना बोल कर ठहर गये।

वहाँ मौजूद भीड़ ने नारे को पूरा करते हुए बोलना शुरू किया- योगी अटल कहना है। ऐसे बड़े दिल के वाजपेयी ने मानो महफ़िल ही लूट ली। उसके बाद अपने उद्बोधन में वाजपेयीजी ने इलाहाबाद में जन्में क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़ के पाकिस्तान के विरुद्ध अच्छे खेल प्रदर्शन की भी अपने अंदाज़ में तारीफ़ की थी।  ख़ैर उसके बाद अटलजी वहाँ से गोरखपुर एयरपोर्ट पहुँचे जहाँ उन्होंने गोरखनाथ मंदिर जाने की इच्छा व्यक्त की। नमन अटल बिहारी वाजपेयी।

वरिष्‍ठ पत्रकार एवं जी न्‍यूज के यूपी स्‍टेट हेड राजीव श्रीवास्‍तव के एफबी वॉल से साभार. राजीव लंबे समय तक हिंदुस्‍तान टाइम्‍स और टाइम्‍स ऑफ इंडिया के साथ भी जुड़े रहे हैं.