प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था रामभरोसे : कांग्रेस

लखनऊ। विगत कई दिनों से उत्तर प्रदेश में हो रही वर्षा एवं इससे उत्पन्न बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से प्रदेश में बीमारियों के फैलाव का संकट उत्पन्न हो गया है। डेंगू, चिकनगुनियां, इन्सेफ्लाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियां विगत कई वर्षो से हजारों लोगों की मौत का कारण बन रही हैं।

विगत 2016 एवं 2017 में डेंगू के व्यापक फैलाव के कारण तमाम जानें गयीं। २०१७ में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में इन्सेफ्लाइटिस ने 1049 मासूम बच्चों की जॉन ली, जिसमें ६२ बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई। इस वर्ष ऐसी कोई स्थिति न बने इसके लिए सरकार पहले से ही व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित करे।

कांग्रेस प्रवक्ता डा. उमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है। अस्पतालों में चिकित्सकों की व्यापक कमी तथा दवा की उपलब्धता एवं अन्य सुविधायें बदहाल स्थिति में है, जिसके चलते अभी से मरीजों को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यदि इस ओर प्रदेश सरकार ने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में प्रदेश विशेष तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में सक्रांमक रोगों के फैलने का डर है।

श्री पाण्डेय ने बताया कि सरकार केजीएमयू लखनऊए पीजीआई लखनऊ की स्थिति संसाधनों की कमी के कारण रोगियों को बलरामपुर अस्पताल रिफर करते हैं, जिसके चलते जिला चिकित्सालय बलरामपुर पर मरीजों के इलाज का अतिरिक्त भार पड़ता है और वहां की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है।

कोआपरेटिव चुनाव में बाहुबल का प्रयोग

कांग्रेस के प्रवक्ता डा. हिलाल अहमद ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हशए कहा कि भाजपा ने समस्त लोकतांत्रिक व्यवस्था को दर किनार करते हुए बाहुबल का इस्तेमाल कर यूपी कोआपरेटिव बैंक का चुनाव करायाए जिसमें अपनी पार्टी के लोगों को निर्विरोध चयनित कराया।

इस चुनाव में विपक्ष के तमाम उम्मीदवारों पर पुलिस बल का प्रयोग कर नामांकन से वंचित रखा। यह न सिर्फ सहकारी आन्दोलन पर कुठाराघात है, बल्कि लोकतंत्र में ग्रामीण आधार को भी चोट पहुंचाने का कार्य है। भारतीय जनता पार्टी की इस सरकार ने तमाम सहकारी चुनाव चाहे वह सहकारी समितियों के हों, सहकारी संघ के हो, लैकफेड, पैकफेड क्रय-विक्रय समितियों के हों इन सभी चुनावों में लोकतंत्र की निर्मम हत्या की। विपक्ष के लोगों को इस चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने के लिए सरकारी तंत्र का खुलेआम दुरुपयोग किया।