होने लगा टीपू सुल्तान से मोहभंग !

राज बहादुर सिंह

: टीपू जयंती से कर्नाटक के सीएम, डिप्टी सीएम क्यों रहे दूर ? : लगता है वोट के जिस लालच में कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती कांग्रेस सरकार ने 2015 में शुरू की थी। उसी लालच (विपरीत) के चलते वह टीपू से दूरी बनाने लगी है। ठीक भी है। घाटे का सौदा भला कांग्रेस को क्यों मंजूर होने लगा। वैसे भी टीपू का साथ कांग्रेस को अब तक तो कुछ रास नहीं आया है और आगे तो साथ कायम रहना ही तय नहीं लगता।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 2015 में धूमधाम से टीपू जयंती मनाई और कहने की जरूरत नहीं कि यह मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए किया गया हालांकि भाजपा कहती रह गयी कि टीपू अत्याचारी था, हिन्दू विरोधी था। बहरहाल विधान सभा चुनाव में कांग्रेस का जो हश्र हुआ वह सभी जानते हैं। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए अपने से कहीं कम संख्या वाली जेडी एस को मुख्यमंत्री की कुर्सी देकर कांग्रेस ने अपनी तरफ से किला फतेह कर लिया।

यह अलग बात है कि कर्नाटक में कांग्रेस अब राजनीतिक बैसाखी पर आ चुकी है। कांग्रेस और जेडीएस को भविष्य का अंदाजा होने लगा है और यही कारण है कि दस नवम्बर को टीपू जयंती से जेडीएस के सीएम कुमारस्वामी व कांग्रेस के डिप्टी सीएम परमेश्वरन ने खुद को अलग रखा। इसका मतलब समझना कोई मुश्किल नहीं है।

उत्तर प्रदेश में तो टीपू से दर्द ही दर्द मिला। अरे यहां टीपू से आशय टीपू सुल्तान से नहीं अखिलेश यादव से है हालांकि सीएम रहते वह भी यूपी के सुल्तान ही थे। कांग्रेस ने टीपू से गलबहियां कीं तो सात विधायक आए। कांग्रेस का यह बदतरीन प्रदर्शन था। टीपू भी लुढ़क गए कांग्रेस का साथ पाकर।कुल मिलाकर कांग्रेस टीपू से मोहभंग की राह पर है।

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राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.