तेवर में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, भ्रष्‍ट अधिकारियों में मची खलबली

योगीजी

: दागी कर्मचारियों को किया जा रहा जबरिया रिटायर : लखनऊ : उत्‍तर प्रदेश में साल 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने जबरदस्‍त तेजी दिखाई थी, लेकिन फिर इसमें धीरे-धीरे कमी आती चली गई। ऐसा लगने लगा कि पिछले दो दशकों से भ्रष्‍टाचार का अमृत पीते चले आ रहे भ्रष्‍ट सिस्‍टम और नौकरशाही ने सपा और बसपा की तरह भाजपा की सरकार को भी अपने लपेटे में ले लिया है। ईमानदार छवि वाले सीएम के अधीनस्‍थ कई मंत्रियों पर भ्रष्‍टाचार के आरोप भी सरेआम लगने लगे, इससे भी महसूस होने लगा योगी आदित्‍यनाथ के हाथ बंधे हुए हैं। वह चाहकर भी भ्रष्‍टाचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन यह सारे कयास उस वक्‍त खत्‍म हो गये जब लोकसभा चुनाव खत्‍म हो जाने के बाद योगी आदित्‍यनाथ ने समीक्षा बैठकों का दौर शुरू किया।

मंत्रियों से लगायत अधिकारियों के साथ बारह से पंद्रह घंटों की लगातार समीक्षा बैठकों के जरिये योगी आदित्‍यनाथ ने एक बार फिर वही तेवर अपना लिये, जो शपथ लेने के बाद अपनाये थे। पिछले दो ढाई दशक में ऐसा पहली बार हो रहा था कि कोई मंत्री खुद ही सभी विभागों की समीक्षा कर रहा हो। अब तक समीक्षा करने का काम वरिष्‍ठ विभागीय अधिकारी करते थे तथा उनके साथ बैठकर मुख्‍यमंत्री समीक्षा कर लेते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा था। योगी आदित्‍यनाथ खुद ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियों के साथ बैठकर समीक्षा कर रहे थे। योगी के इस कदम से कागजों पर काम दिखाकर वाहवाही लूटने वाले अधिकारियों को पसीने आने लगे। योगी की जमीनी समझ ने ऐसे अधिकारियों के समक्ष और ज्‍यादा मुश्किल खड़ा कर दी। अन्‍य मुख्‍यमत्रियों की तरह योगी को बहकाना और बहलाना मुश्किल होने लगा।

अधिकारी इन समीक्षाओं से खाली नहीं हुए थे कि सीएम ने मंडल स्‍तर पर भी समीक्षा की शुरुआत कर दी। इसमें लापरवाही बरतने पर कई अधिकारियों को निलंबित किया गया। साथ ही योगी सरकार ने 50 साल से ज्‍यादा के लापरवाह, भ्रष्‍टाचारी कर्मचारियों को जबरिया रिटायरमेंट दे रही है। योगी सरकार के इस कदम की जनता में जबरदस्‍त सराहना हो रही है। दअरसल, सपा-बसपा काल में ईमानादारी से परहेज करने वाले मुख्‍यमंत्रियों और मंत्रियों के दौर में अधिकारियों ने जमकर लूट मचाई थी। दस परसेंट नेता-मंत्रियों को देते थे तो चालीस परसेंट खुद खाते थे, लेकिन इस सरकार में चुनिंदा भ्रष्‍ट मंत्रियों को छोड़ दें तो मुख्‍यमंत्री समेत कई मं‍त्रियों की छवि साफ-सुथरी है। इसके चलते आदतन भ्रष्‍ट अधिकारियों को इस बार भ्रष्‍टाचार करने में अतिरिक्‍त मेहनत करनी पड़ रही है। भ्रष्‍टाचार का खुलासा होने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है।

क्रांतिकारी साबित हो सकता है 1076

मुख्‍यमंत्री को अधिकारियों पर पूरी तरह भरोसा नहीं है, लिहाजा वह समूचे सिस्‍टम को ऑनलाइन करने में जुटे हुए हैं। योगी आदित्‍यनाथ मानते भी रहे हैं कि उन्‍हें इन्‍हीं अधिकारियों से काम लेना है, वह पूरी तरह इन्‍हें बदलकर ईमानदार नहीं बना सकते हैं। ईमानदार अधिकारियों की संख्‍या उंगलियों पर गिनी जा सकती है, लिहाजा योगी आदित्‍यनाथ तकनीक के सहारे भ्रष्‍टाचार को न्‍यूनतम स्‍तर तक लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

मुख्‍यमंत्री हेल्‍पलाइन का टोल फ्री नंबर 1076 इसी का एक अंग है। इस हेल्‍पलाइन पर 24 घंटे आमजन की समस्‍या सुनी जायेगी। इसकी निगरानी पूरी तरह मुख्‍यमंत्री खुद करेंगे, क्‍योंकि वह अधिका‍रियों के भरोसे छोड़ी गई तमाम योजनाओं का हश्र देख चुके हैं। जब तक समस्‍या का समाधान नहीं होगा तब उसका फालोअप किया जायेगा। इसमें संबधित अधिकारी की जिम्‍मेदारी तय की जायेगी तथा उनके खिलाफ कार्रवाई भी होगी। इस कार्रवाई को अधिकारी के एसीआर से जोड़ा जायेगा। योगी ने इस हेल्‍पलाइन की शुरुआत प्रदेश की जनता को परेशानी तथा अपनी समस्‍या लेकर यहां वहां दौड़ने में होने वाले आर्थिक नुकसान को बचाने के लिये किया है।