स्ट्राबेरी और गुड़ महोत्सव के बाद अब सिद्धार्थनगर में तीन दिनीं कालानमक चावल महोत्सव

: सीएम योगी आदित्यनाथ आज महोत्सव का वर्चुअली उद्घाटन : महोत्सव में ले सकेंगे काला नमक चावल के लजीज व्यंजनों का स्वाद : स्वाद के साथ ले सकेंगे नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद : उत्कृष्ट व्यंजन बनाने और स्टॉल लगाने वालों को मिलेगा सम्मान : लखनऊ। झांसी के स्ट्राबेरी और लखनऊ के गुड़ महोत्सव की तर्ज पर शनिवार से सिद्धार्थनगर में तीन दिवसीय ‘कालानमक चावल महोत्सव’ आयोजित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार सुबह 11.30 बजे इसका वर्चुअली उद्घाटन करेंगे। राजकीय इंटर कालेज, नौगढ़ के प्रांगण में आयोजित इस तीन दिवसीय (13 से 15 मार्च) महोत्सव में कालानमक चावल से निर्मित व्यंजनों के स्टाल लगाने के साथ इसका उम्दा व्यंजन लगाने वालों को सम्मानित भी किया जाएगा।

महोत्सव में आने वाले लोग कालानमक चावल से बने व्यंजन का स्वाद लेने के साथ कालानमक धान के बीज और चावल के स्टॉल से खरीददारी भी कर सकेंगे। उन्हें केंद्र एवं प्रदेश सरकार के एक जिला-एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) में शामिल कालानमक की खेती के बारे में जागरूक करने के साथ कालानमक चावल की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक खूबियों से विषय विशेषज्ञ अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान एवं लोकल फॉर वोकल अभियान के अंतर्गत एक जिला एक उत्पाद के रूप में चयनित उत्पादों के प्रमोशन, मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के क्रम के लिए मिले निर्देशों के क्रम में यह आयोजन किया जा रहा है। कालानमक चावल महोत्सव में

कालानमक चावल के विभिन्न व्यंजन प्रदर्शित होंगे। महोत्सव में कालानमक चावल के विविध व्यंजन जैसे खीर, पुलाव, जीरा राइस, चावल, दाल, सब्जी, चावल-छोला, पोहा, खिचड़ी, फरा, इडली आदि के स्टाल लगेंगे।

रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन: कालानमक चावल महोत्सव में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे जिसमें स्थानीय कलाकारों एवं छात्रों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन का मौका मिलेगा। इस कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को भी कालानमक चावल की खेती और उसके प्रसंस्करण संबंधी जानकारी प्रदान की जाएगी।

कालानमक धान की खेती की बढ़ेगी लोकप्रियता: कालानमक चावल बुद्ध के महाप्रसाद के रूप में प्रतिष्ठित है।भौगौलिक सम्पदा (जीआई) घोषित कालानमक अकेले सिद्धार्थनगर ही नहीं बल्कि समान कृषि जलवायु ( एग्रो क्लाइमेटिक ज़ोन) वाले जनपदों गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा और श्रावस्ती का भी एक जिला एक उत्पाद है। कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने खेतीबाड़ी के संबन्ध में ओडीओपी की जो सूची जारी की थी उसमें सिद्धार्थनगर के साथ बाकी जिलों को भी शामिल किया गया है। इसके पहले मुख्यमंत्री झांसी के स्ट्रॉबेरी महोत्सव का वर्चुअल रूप से और लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय गुड़ महोत्सव का भी उद्घाटन कर चुके हैं। आगे ड्रैगन फ्रूट महोत्सव का भी आयोजन होना है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. नवनीत सहगल ने बताया कि सरकार की मंशा खेतीबाड़ी के जो भी उत्पाद ओडीओपी में शामिल हैं। जिनके प्रसंस्करण की संभावना है, उन सबके लिए ऐसा ही महोत्सव आयोजित करने की है। इससे ये उत्पाद ब्रांड के रूप में और मजबूती से स्थापित होंगे। मांग बढ़ेगी तो किसानों की आय बढ़ेगी। सरकार का मकसद भी किसानों की आय बढ़ाना है। इसके लिए चार साल पहले सरकार बनने के पहले दिन से ही मुख्यमंत्री इसके लिए पूरी शिद्दत से लगे हैं। उनके प्रयासों से बहुत कुछ बदला भी है। ऐसे आयोजनों से यकीकन बदलाव की यह प्रक्रिया और तेज होगी।