मामा भांजे का केवल एक ही बैंक से इससे तिगुने का फ्रॉड है

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राज बहादुर सिंह

: कांग्रेस एक मेढक- हर बात पर टर्र-टर्र : दास्तान-ए-स्विस बैंक : लखनऊ : दो दिन से स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा धन पर तू-तू मैं-मैं चल रही है। मजबूरी वश इसे देखना, सुनना और पढ़ना पड़ रहा है। खैर इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद जब पूरे सिलसिले पर फिर से गौर किया तो कई तरह के भाव उभरे। कहीं संतोष पनपा तो कहीं सहानुभूति उत्पन्न हुई। निराशा को भी स्थान मिला और ऐसे लोगों के प्रति बनी धारणा और मजबूत हुई जो किसी खास नजरिए के चलते किसी व्यक्ति विशेष के प्रति नफरत का माहौल बनाने के मंसूबे पाले हुए हैं और मुल्क का नुकसान ही नहीं कर रहे बल्कि मुल्क से गद्दारी पर उतारू हो गए हैं।

खैर, गद्दारों की बात ही क्या। कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले हुए हैं। आइए स्विस बैंक की बात करें। खबर आई कि पिछले एक साल में स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन 50 % बढ़कर 7000 करोड़ हो गया। तीन साल से यह घट रहा था, लेकिन पिछले एक साल में यह 4500 करोड़ से बढ़कर 7000 करोड़ हो गया।

बस यह जानते ही कांग्रेस की अगुवाई में कुछ पार्टियां, कुछ व्यक्ति और विशेष सेक्शन के लोग छाती पीटने लगे। ब्लैक मनी को लेकर तंज करने लगे। कांग्रेस और इसके मुखिया की हालत तो मेढक जैसी हो गयी है। हर बात पर फुदकते हैं और टर्र-टर्र करने लगते है फिर चाहे मसले का लेवल कुछ भी हो। तथ्य कुछ भी हों।

भारतीयों का स्विस बैंकों में कुल जमा 7000 करोड़ है। इनमें तमाम ऐसे भारतीय भी हैं, जो भारतीय मूल के हैं लेकिन रहते विदेश में हैं और नागरिकता भी वहीं की है। भारतीय मूल के किसी भी देश के नागरिकों का स्विस में जमा धन 7000 करोड़ है। आइए अब इन तथ्यों की रौशनी में आगे बढ़ते हैं।

बीते महीनों में मामा भांजे (नीरव मोदी-मेहुल चोकसी) ने पंजाब नेशनल बैंक से ही 20000 करोड़ का अनुमानित फ्रॉड किया। विजय माल्या की 9000 करोड़ की धोखधड़ी। कई और ऐसे मामले। स्विस बैंक में संसार भर के भारतीयों का 7000 करोड़ और मामा भांजे का केवल एक ही बैंक से इससे तिगुने का फ्रॉड। मतलब क्या हुआ इसका?

मतलब स्विस बैंक में जमा 7000 करोड़ का अमाउंट तो कुछ हुआ ही नहीं। इसमें भी 2500 करोड़ बीते एक साल में आया जब यह बात सामने आ चुकी थी कि नई संधि की रौशनी में स्विस बैंकों को अब भारत को बैंकों में जमा राशि का ब्यौरा देना होगा। जाहिर है कि इस तथ्य के सार्वजनिक होने के बाद स्विस बैंक में वही भारतीय रुपया जमा करेगा, जिससे हमारी ऑथोरिटीज पूछताछ नहीं कर सकती या जो छाती ठोंक कर इसका विवरण दे सकता होगा।

सम्यक विश्लेषण से यह संभावना बलवती प्रतीत होती है कि बीते तीन चार सालों में स्विस बैंको में भारतीयों का जमा अकूत धन अब निकाला जा चुका है और अब जो धन जमा है उसका अधिकांश हिस्सा उनका है, जिनके पास हिसाब है या फिर वह धन है, जिसको कोई क्लेम करने वाला नहीं है।

और फिर परिवार सहित अदालतों में कभी बेल तो कभी रोक लगाने कि गुहार करने वाले पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम की लायी लिब्रेलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS)भी तो है, जिसके तहत एक साल में ढाई लाख डॉलर बाहर भेजे जा सकते हैं। अब अगले साल से विवरण मिलने लगेगा। और फिर सोचिए कि दुनिया भर के भारतीयों का केवल 7000 करोड़ जमा होना कितना अर्थपूर्ण है या अपूर्ण है या औचित्यपूर्ण है।rbs

राज बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के जाने माने पत्रकार हैं. हिंदी-अंग्रेजी पर समान पकड़ रखते हैं. दैनिक जागरण समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं. सियासतफिल्म और खेल पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले श्री सिंह फिलहाल पायनियर में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. उनका लिखा फेसबुक से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.