नालंदा सीट पर संजीव रंजन सिंह बिगाड़ सकते हैं श्रवण कुमार का खेल

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कुमार आलोक

  • शेर सिंह राणा की पार्टी से उतरे हैं चुनावी समर में
  • दोनों गठबंधनों से कुर्मी प्रत्‍याशी उतरने से टुन्‍ना लड़ाई में

पटना : नालंदा विधानसभा सीट बिहार के सबसे महत्‍वपूर्ण सीटों में आता है। इस सीट पर हार या जीत को नीतीश कुमार से जोड़ा जाता है। नीतीश कुमार का गृह जनपद होने के नाते यह सीट उनकी प्रतिष्‍ठा का सवाल होता है। बीते छह विधानसभा चुनाव में इस सीट पर नीतीश की पार्टी के श्रणव कुमार जीतते आ रहे हैं, लेकिन इस बार यहां का चुनावी समीकरण बदल सकता है।

इसका सबसे महत्‍वपूर्ण कारण है कि इस बार श्रवण कुमार के मजबूत पिलर रहे संजीव रंजन सिंह उर्फ टुन्‍ना सिंह का चुनावी समर में उतरना। राजपूत करणी सेना के प्रदेश सचिव संजीव रंजन सिंह इस बार खुद नालंदा से चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। टुन्‍ना सिंह को राजपूत नेता शेर सिंह राणा की राष्‍ट्रीय जनलोक पार्टी (सत्‍य) ने अपना उम्‍मीदवार बनाया है।

संजीव रंजन की उम्‍मीदवारी से श्रवण कुमार को झटका लग सकता है। संजीव की जदयू के तमाम लोगों में भी गहरी पैठ है। मिलनसार और जुझारू टुन्‍ना सिंह को एकमात्र सवर्ण प्रत्‍याशी होने का भी लाभ मिलता दिख रहा है, क्‍योंकि कांग्रेस ने गुंजन पटेल को उम्‍मीदवार बनाया है। एनडीए से जदयू के श्रवण कुमार उम्‍मीदवार हैं तो महागठबंधन से यह सीट कांग्रेस के खाते में गई है।

एनडीए और महागठबंधन के प्रत्‍याशी कुर्मी बिरादरी से आने के चलते दोनों गठबंधन में कुर्मी वोटों का बंटवारा तय है। ऐसी स्थिति में संजीव रंजन सिंह को सवर्णों का वोट मिलना तय माना जा रहा है। टुन्‍ना सिंह की दलित एवं गैरयादव पिछड़ों में भी मजबूत पकड़ है। श्रवण कुमार के करीबी रहने का लाभ भी टुन्‍ना सिंह को मिल सकता है, क्‍योंकि उनसे नाराज वोटर टुन्‍ना के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं।

अगर नालंदा सीट के जातीय समीकरण देखें तो इस सीट पर कुर्मी वोटरों की संख्‍या सर्वाधिक है। इसके बाद दलित जाति आती है। इस सीट पर मुस्लिम, राजपूत वोटरों की भी अच्‍छी संख्‍या है। 425000 से ज्‍यादा आबादी वाले इस सीट पर पिछले छह बार से श्रवण कुमार जीतते आ रहे हैं। जदयू ने इस बार भी उन्‍हें प्रत्‍याशी बनाया है, लेकिन मंत्री होने के बावजूद क्षेत्र में विकास नहीं कराने से जनता नाराज है।

नाराज जनता महागठबंधन की तरफ ना जाकर लोजपा या फिर संजीव रंजन सिंह टुन्‍ना की तरफ आ सकती है। बीते चुनाव में राजद के साथ गठबंधन में श्रवण कुमार ने भाजपा प्रत्‍याशी कौशलेंद्र कुमार को मात्र तीन हजार वोट के अंतर से हरा पाये थे। उनके करीबी टुन्‍ना के चुनावी समर में उतरने के चलते उनकी राह मुश्किल हो गई है। टुन्‍ना मजबूत लड़ाई में दिख रहे हैं। स्‍थानीय लोगों कहना है कि टुन्‍ना जीत भले ही ना सकें, लेकिन श्रवण कुमार का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। फिलहाल टुन्‍ना के चुनावी समर में उतरने से जदयू और श्रवण कुमार दोनों की सांसें अटकी हुई हैं।