मुजफ्फरपुर अंडरवर्ल्ड की इनसाइड स्टोरी-3 : छोटन शुक्ला की हत्या ने बिहार में भूचाल ला दिया

कुणाल वर्मा

: जिस अशोक सम्राट से पूरा बिहार कांपता था उसे एक मामूली इंस्पेक्टर ने मार गिराया : : गोपालगंज के डीएम को भीड़ ने मार डाला : छोटन शुक्ला की हत्या ने पूरे बिहार के अंडरवर्ल्ड में उथल-पुथल मचा दी थी। यह वह दौर था जब पूरे बिहार का अंडरवर्ल्ड बूथ कैपचरिंग से आगे बढ़कर खुद खादी वस्त्र धारण करने को बेताब था। मुंगेर, पटना, सीवान, छपरा, मधेपुरा, हर तरफ बिहार विधानसभा के 1995 के चुनाव में अंडरवर्ल्ड का कोई न कोई बड़ा नाम चुनाव लड़ रहा था। पूरे तिरहुत प्रमंडल में छोटल शुक्ला ने अपनी राजनीतिक पकड़ के जरिए बड़ी चुनौती दे दी थी। छोटन शुक्ला की हत्या ने बिहार को एक और राजनीतिक मुद्दा दे दिया था। यह मुद्दा था भूमिहार-राजपूत का संगठित वर्चस्व वर्सेज पिछड़े और दलितों की राजनीति।

डॉन अशोक सम्राट की तस्वीर

छोटन शुक्ला की शव यात्रा में गोपालगंज के डीएम की हत्या ने बैठे बिठाए एक और मुद्दा भी दे दिया था। गोपालगंज के डीएम दलित थे। न्यायालय के पन्नों में दर्ज कई सौ पेज की रिपोर्ट में काफी विस्तार से इस हत्याकांड के बारे में बताया गया है। इन पन्नों में दर्ज तमाम गवाहों की गवाही कहती है कि किस तरह नया टोला स्थित छोटन शुक्ला के घर से निकली शव यात्रा जब भगवानपुर पहुंची तो वहां क्या हुआ था। भगवानपुर में करीब पांच हजार लोगों की भीड़ के बीच में आनंद मोहन ने एक आक्रोशित भाषण दिया था। जिसके कुछ अंश भी इन पन्नों में दर्ज हैं।

आनंद मोहन ने अपने भाषण में छोटन शुक्ला की हत्या में शामिल लोगों को कुत्तों की मौत मारने और बिहार में खून की होली खेलने जैसी भड़काऊ बातें भी कही थी। भगवानपुर में भाषणबाजी के बाद शवयात्रा खबड़ा और रामदयालु होते हुए छोटन शुक्ला के पैतृक गांव लालगंज जानी थी। खबड़ा मूलरूप से भूमिहार बहुल क्षेत्र है। यहां जबर्दस्त भीड़ थी। लोग आक्रोशित थे। इसी बीच हाजीपुर से मीटिंग समाप्त कर गोपालगंज लौट रहे डीएम जी कृष्णैया भीड़ में फंस गए। सरकार और प्रशासन के खिलाफ आक्रोशित भीड़ में से किसी ने रिवाल्वर से उनपर फायर झोंक दिया। बहुत नजदीक से उन्हें गोली मार दी गई।

सैकड़ों पुलिसकर्मी भी शवयात्रा के शांतिपूर्वक निकालने के लिए लगाए गए थे। पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बीच डीएम को गोली मार दी गई। गोली लगने के बाद वहां अफरातफरी मच गई। पुलिस ने भी जमकर लाठीचार्ज किया। इस लाठीचार्ज में सैकड़ों लोग घायल हुए। डीएम को घायलावस्था में एसकेएमसीएच ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हाजीपुर पहुंचते-पहुंचते आनंद मोहन और लवली आनंद गिरफ्तार कर लिए गए। उधर, लालगंज के पैतृक गांव में छोटन शुक्ला का दाह संस्कार कर दिया गया। पर डीएम की हत्या ने बिहार की पूरी राजनीति में भूचाल ला दिया। एक दलित अधिकारी को सवर्णों की भीड़ के बीच हत्या ने बिहार की राजनीति को नया जातिगत मुद्दा दे जो दे दिया था।

डॉन अशोक सम्राट की तस्वीर

अशोक सम्राट का इनकाउंटर : अशोक सम्राट ने भले ही मुजफ्फरपुर से अपना किनारा कर लिया था, लेकिन उसके प्रभाव से सभी वाकिफ थे। बताते हैं कि अशोक सम्राट के मुजफ्फरपुर से दूर जाने के पीछे उसका व्यापारिक दिमाग था। उन दिनों बरौनी और हाजीपुर रेल डिविजन में रेलवे का काम जोरों पर था। यहां एकाधिकार अशोक सम्राट ने जमाया। रेलवे के सभी ठेकों और नीलामी में उसी की तूती बोलती थी। जिस सूरभान सिंह के नाम से बिहार कांपता था, उसी सूरजभान सिंह को अशोक सम्राट ने अपने जीते जी कभी मोकामा से बाहर नहीं निकलने दिया। अशोक सम्राट का असली नाम अशोक राय था। वह भी बेगुसराय की क्रांतिकारी धरती की पैदाइश था। कम्यूनिस्ट विचारधारा की जननी बेगुसराय के लोगों में सम्राट लगाने का प्रचलन था। इसी क्रम में अशोक राय से वह अशोक सम्राट बन गया था। अशोक सम्राट के इनकाउंटर की कहानी भी बेहद रोचक है।

पूरी फिल्मी है इनकाउंटर की कहानी :उन दिनों अशोक सम्राट का पूरा ध्यान हाजीपुर रेलवे के ठेकों की तरफ था। इसी दौरान वैशाली थाने में पोस्टिंग हुई इंस्पेक्टर शशि भूषण शर्मा की। उस समय शशि भूषण शर्मा की पहचान एक तेज तर्रार पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में थी। हाजीपुर और आसपास के क्षेत्रों में क्राइम का ग्राफ लगातार बढ़ रहा था। शशि भूषण शर्मा ने आते ही सबसे पहले अपने इंफॉर्मर सोर्स को मजबूत किया। इसी क्रम में सबसे बड़ी सफलता उन्हें हाथ लगी, अशोक सम्राट को लेकर। पुलिस डायरी में दर्ज इतिहास के अनुसार शशि भूषण शर्मा ने एक करीबी इनकाउंटर में अशोक सम्राट को मार गिराया। शशि भूषण शर्मा रातों रात हीरो बन चुके थे। इस सफलता पर उन्हें गैलेंटरी अवॉर्ड भी मिला। पर जिस अशोक सम्राट से पूरा बिहार कांपता था उसे एक मामूली इंस्पेक्टर ने कैसे मार गिराया यह किसी को समझ नहीं आ रहा था।

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अंडरवर्ल्ड से जो अंदरुनी कहानी निकलकर आई वो चौंकाने वाली थी। दरअसल अशोक सम्राट ने भी खादी पहनने की चाहत पाल ली थी। आनंद मोहन की पार्टी से उसका टिकट भी पक्का हो गया था। पर बिहार में जातिवाद के राजनीतिक कॉकटेल ने अशोक सम्राट को हर तरफ से घेर लिया था। अशोक सम्राट के ही एक नजदीकी ने मुखबिरी की थी। पुलिस डायरी के अनुसार अशोक सम्राट के इनकाउंटर बाद उसके पास से पुलिस ने एके-47 बरामद किया था। इसलिए यह बात किसी को पच नहीं रही थी कि थ्री नॉट थ्री की राइफल और रिवॉल्वर के सहारे इंस्पेक्टर शशि भूषण शर्मा और उसकी टीम ने अशोक सम्राट का इनकाउंटर कैसे कर दिया। इतनी आसानी से कोई कैसे अशोक सम्राट तक पहुंच सका था।

डॉन अशोक सम्राट की तस्वीर

अंडरवर्ल्ड की बातों पर विश्वास करें तो किसी नजदीकी ने सम्राट को नशीला पदार्थ मिलाकर खिला दिया था और पैसों के लालच में मुखबिरी कर दी थी। पहली बार अशोक सम्राट ने ही बिहार में एके-47 से हत्या का सिलसिला शुरू किया था और उसी अशोक सम्राट के पास से पहली बार बिहार पुलिस ने एके-47 भी बरामद किया था। बिहार पुलिस के पास यह सूचना तो पहले से ही थी कि बिहार के अपराधियों के पास पुरुलिया में गिरे अत्याधुनिक हथियारों के साथ मुंगेर में बनने वाले हथियार मौजूद हैं। पर यह पहली बार था कि किसी अपराधी के पास एके-47 जैसे हथियार बरामद हुए थे।

इंस्पेक्टर शाशि भूषण शर्मा रातों रात हीरो बन गए। उन्हें गैलेंटरी अवॉर्ड से नवाजा गया। अशोक सम्राट इनकाउंटर के बाद उन्हें आउट आॅफ टर्म प्रमोशन मिला। शर्मा को प्रेसिडेंट मेडल तक से नवाजा गया। वो डीएसपी बना दिए गए। इसके बाद उनके नाम के साथ कई और इनकाउंटर जुड़े और बिहार पुलिस के इनकाउंटर स्पेशलिस्ट बन गए। हालांकि अशोक सम्राट के इनकाउंटर से पहले शर्मा नौ साल तक सस्पेंड रहे थे। शशि भूषण शर्मा ही वो शख्स थे जिनके ऊपर फिल्म गंगाजल की स्क्रिप्‍ट लिखी गई थी।

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आंखफोड़वा कांड : शशि भूषण शर्मा साल 1979-80 में भागलपुर अंतर्गत नवगछिया थाने में पोस्टेड थे। सबसे पहले उनके ही थाने से 1979 में आंखफोड़वा कांड की शुरुआत हुई थी। उस वक्त के एसपी थे भारतीय पुलिस सेवा के 1973 बैच के अधिकारी बीडी राम। पूरा नाम था विष्णु दयाल राम। यही बीडी राम मुजफ्फरपुर के भी एसपी रहे। आंखफोड़वा कांड एक तथाकथित थर्ड डिग्री पुलिसिया कार्रवाई थी। देखते ही देखते भागलपुर को अपराध मुक्त बनाने के लिए करीब 34 अपराधियों की आंखों में तेजाब डाल कर उन्हें अंधा बना दिया गया। करीब एक साल तक भागलपुर में यह तांडव चलता रहा। मामला राजधानी पटना तक पहुंचा, लेकिन पुलिसकर्मियों पर असर नहीं हुआ। पर जल्द ही यह मामला मीडिया के जरिए दिल्ली तक पहुंच गया।

भागलपुर के एक स्थानीय वकील ने दिलेरी दिखाते हुए आंखफोड़वा कांड के 11 पीड़ितों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कमेटी का गठन हुआ। जांच कमेटी को पुलिस की दरिंदगी के कई सबूत मिले। मामला चलता रहा। इसकी कहानी काफी लंबी है। पर इतना बता दूं कि कोर्ट के आदेश पर कई पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए। बड़े अधिकारियों का तबादला हुआ। पुलिस वालों के समर्थन में पूरे भागलपुर जिले में खूब प्रदर्शन हुआ।

सस्पेंड हुए पुलिसकर्मियों में एक बड़ा नाम शशि भूषण शर्मा का भी था। करीब नौ साल सस्पेंड होने के बाद शर्मा को दोबारा पोस्टिंग मिली। इसी पोस्टिंग के बाद शशि भूषण शर्मा ने बिहार का अब तक का सबसे बड़ा इनकाउंटर कर डाला। उधर एसपी बीडी राम आंखफोड़वा एसपी के नाम से चर्चित हुए। जहां भी उनकी पोस्टिंग हुई अपराधियों में खौफ पैदा हुआ। आंखफोड़वा कांड की सीबीआई इंक्वायरी में बीडी राम कभी चार्जशीटेड नहीं हुए। हालांकि कई बार उनसे पूछताछ जरूर हुई।

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शशि भूषण शर्मा की जिंदगी एक रहस्य से भरी रही। 9 दिसंबर 2010 को शशि भूषण शर्मा को उस वक्त गोली मार दी गई जब वो ड्यूटी से घर लौट रहे थे। उस वक्त शशि भूषण शर्मा पटना पुलिस टीम के हिस्सा थे और ट्रैफिक डीएसपी के पद पर थे। शशि भूषण शर्मा पर हमला पटना के सबसे पॉश एरिया छज्जूबाग में हुआ था। इस हमले में उन्हें दो से तीन गोलियां लगी थी। पहले उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया फिर दिल्ली के वेदांता में उनका लंबे समय तक इलाज चला। पुलिस ने कई बार उनसे पूछा कि हमला करने वाले कौन थे, पर शर्मा हर बार अनजान बने रहे। पुलिस को शक था कि हमला करने वालों को शर्मा जानते थे, क्योंकि उन पर बेहद करीब से हमला हुआ था। शर्मा इस वक्त पुलिस सेवा से सेवानिवृत हो चुके हैं।

बताते चलूं कि शशि भूषण शर्मा छोटन शुक्ला हत्याकांड के तथाकथित मुख्य साजिशकर्ता बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड के इनवेस्टिगेशन आॅफिसर भी रहे थे। मेरी दिली इच्छा है कि जब मैं कभी बिहार में रहूं तो शशि भूषण शर्मा का साक्षात्कार करूं और वो सबकी सत्यता जानने की कोशिश करूं जो किस्से कहानियों में है। खासकर अशोक सम्राट के इनकाउंटर की अंदरूनी कहानी।

लेखक कुणाल वर्मा वरिष्‍ठ एवं जानेमाने पत्रकार हैं. वे आई नेक्‍स्‍ट, दैनिक जागरण समेत तमाम बड़े संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पदों पर रह चुके हैं. फिलवक्‍त आज समाज के समूह संपादक के रूप में सेवारत हैं.