…अब कह के ही मानेगा अनकहा लखनऊ!

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मनोज श्रीवास्तव

: टंडन की किताब आने के बाद खिलजी काल में तोड़े गये “शेष गुफा” को लेकर बढ़ा कौतूहल : लक्ष्मण को लेकर लखनऊ करेंगे “लाल” : लखनऊ। लक्ष्मण टीले के सामने लखनऊ नगर निगम ने भगवान राम के अनुज और पौराणिक मान्यताओं के आधार पर लखनऊ शहर को बसाने वाले लक्ष्मण जी की भव्य प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव पारित किया है। जिसे लेकर लक्ष्मण किला क्षेत्र में बनी मस्जिद के इमाम ने विरोध दर्ज कराके माहौल गरम कर दिया है।

हाल में बीते रमजान माह में राजधानी के प्रसिद्ध मनकामेश्वर महादेव मंदिर की महंत दिव्या गिरी द्वारा आयोजित रोजा आफ्तारी में भाग लेकर गंगा-जमुनी सभ्यता की मिसाल की बात करने वाले लक्ष्मण टीले क्षेत्र में बनी मस्जिद के इमाम नगर-निगम के पारित प्रस्ताव से बिलबिला गये।

मेयर लखनऊ संयोगिता भाटिया ने कहा कि नगर निगम ने प्रस्ताव पारित किया है कि शहर लक्ष्मण जी के नाम पर बना है तो यहां उनकी एक बड़ी प्रतिमा लगे। हम उसको लक्ष्मण टीले पर न लगा कर सामने चौराहे पर लगाने पर विचार करेंगे। जिस पर लक्षण टीला क्षेत्र में बनी मस्जिद के इमाम मौलाना फजलुल मन्नान रहमानी ने यह कह कर विरोध दर्ज कराया है कि यदि यहाँ लक्ष्मण जी की प्रतिमा लग जायेगी तो यहां पर भारी संख्या में आने वाले नमाजियों को नमाज पढ़ने में दिक्कत आएगी।

मेयर ने बताया कि उन्‍होंने यह भी कहा है कि इसके विरोध में हम सड़क पर उतर कर हर तरीके से अपना विरोध दर्ज करायेंगे। भाजपा नेता नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि इस शहर को लक्ष्मण जी ने बसाया है, लक्ष्मणजी की प्रतिमा यहां नहीं लगेगी तो कहाँ लगेगी? हम मस्जिद में तो कोई परिवर्तन करने नहीं जा रहे हैं। यदि हम मस्जिद को लक्ष्मण वाली मस्जिद कहते तो विवादित होता।

बता दें कि लखनऊ से भाजपा के पूर्व सांसद रहे लाल जी टंडन की किताब “अनकहा लखनऊ” का जब से विमोचन हुआ तब से शहर में लक्षण के अस्तित्व को ले कर घमाधन मच गया है। टंडन ने अपनी किताब में लिखा है कि इतिहास के साथ अक्षम्य  छेडछाड़ का जीता जागता प्रतीक  बन कर “लक्ष्मण टीला” हम सब के सामने मौजूद है।  यहां लक्ष्मण मंदिर  के रूप में “शेष गुफा” थी, लक्ष्मण जी शेषनाग के अवतार थे। इस लिए उनकी उपासना के लिए यहां शेष गुफा बनायी गयी थी।

किताब में आगे लिखा गया है कि लोगों की आस्था थी कि यहां चढ़ाया गया प्रसाद सीधे शेषनाग के मुंह में जायेगा। इसे शेष तीर्थ कहा जाता था। यह टीला पुरातात्विक अवशेषों से भरा पड़ा है। खिलजी के वक्त यह गुफा ध्वस्त कर दी गयी थी। “लक्ष्मण टीला” शहर का मुख्य स्थान था, इस लिए औरंगजेब के समय यहां एक मस्जिद बनवा दी गयी। 1857 में अंग्रेजों के समय यहां भारी तोड़-फोड़ हुई।

लालजी टंडन की किताब आने के बाद बढ़ते विवाद को देखते हुए विश्व पुरोहित परिषद ने लक्ष्मण टीले की सेटेलाइट की सहायता से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की मांग कर रहा है। संगठन के प्रवक्ता डॉ. विपिन पांडेय ने कहा है कि लखनऊ शांति और मोहब्बत के पैगाम का शहर है। कोई कट्टरपंथी भी इससे इनकार नहीं कर सकता कि यह शहर लक्ष्मणजी ने बसाया था तो इसके पुरातात्विक जांच करा के सरकार दूध-पानी अलग करा सकती है।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.