विश्‍वास नहीं होता कोई पुलिसवाला ऐसा भी कर सकता है, सुनें आडियो  

राजीव गुप्‍ता

: तनख्‍वाह के पैसे से बचाई दो बच्चियों की जान : पुलिस का चेहरा मानवीय बनाने में जुटे हैं त्रिपुरारी पांडेय : चंदौली। पुलिस! इस शब्‍द को सुनते हमारे जेहन में पहला विचार क्‍या उभरता है? यही ना, एक क्रूर चेहरा! बदतमीजी भरा व्‍यवहार! फर्जी फंसा दिए जाने का डर! अपमानित होने का खौफ! बिना पैसे कोई सुनवाई ना होने का दर्द!  दरअसल, पुलिस की छवि इतनी खराब हो चुकी है कि लोग थाना-चौकी अपनी जेन्‍यूइन समस्‍या लेकर जाने से भी डरते हैं।

ये हालात तब और बदतर हो जाते हैं जब कोई पुलिसकर्मी किसी पीडि़त के साथ बदतमीजी पर उतर आता है। उसकी सही बात को भी गलत साबित करने में जुट जाता है। ऐसे वीभत्‍स छवि वाली पुलिस के बीच अगर कोई ऐसा भी हो जो ना केवल सबकी सुनता हो बल्कि उचित व्‍यवहार करने के साथ पीडि़त की मदद को भी तत्‍पर हो, तब सहसा विश्‍वास करना मुश्किल होता है कि क्‍या यह भी पुलिसवाला है?

पर, चंदौली जिले का एक पुलिस अधिकारी यूपी पुलिस की छवि को बदलने के साथ उसका चेहरा मानवीय बनाने में जुटा हुआ है। यह पुलिस अधिकारी पुलिसिंग के साथ अपने सामाजिक दायित्‍वों का भी निर्वहन अपनी व्‍यक्तिगत प्रयास से करता चला आ रहा है। चाहे वह मलिन बस्‍ती के बच्‍चों को शिक्षा दिलाने का मामला हो या किसी गरीब की अपने सेलरी के पैसे से मदद कर देने की।

यह घटना एक-दो दिन पहले की है। बताया जाना इसलिए भी जरूरी है ताकि और पुलिसवाले इस अधिकारी से सीख लेकर अंग्रेजों वाली पुलिस मानसिकता से बाहर निकले। खैर, इस पुलिस अधिकारी का नाम है त्रिपुरारी पांडेय, जो सकलडीहा तहसील के क्षेत्राधिकार हैं। मामला यह है कि सकलडीहा कोतवाली के अंतर्गत आने वाले नरैना गांव के पास दो छोटी बच्चियां सड़क किनारे शौच कर रही थीं। इसी बीच तेज गति से आ रही बाइक संख्या UP 67 V 8079 का चालक असंतुलित इन बच्चियों को ठोंक दिया।

बाइक सवार खुद भी गिर गया। इस घटना में दोनों बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही सकलडीहा क्षेत्राधिकारी त्रिपुरारी पांडेय ने मौके पर सकलडीहा कोतवाल को मय फोर्स भेजा। कोतवाल ने गंभीर रूप से घायल बाइक चालक राजू पुत्र शंकर राम निवासी बरठी और अंतिमा पुत्री जयराम को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचवाया। इस घटना में घायल संजना 5 वर्ष पुत्री राजेन्द्र कुमार को सामुदायिक चिकित्सालय भेजवाया।

जांच में पता चला कि मासूम संजना गंभीर रूप से घायल है। बच्‍ची की स्थिति खराब होती देख इलाज के दौरान डॉ. धीरेंद्र कुमार व संतोष सिंह ने उसे  जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दोनों बच्चियों के गंभीर होने की जानकारी मिलने के बाद सीओ त्रिपुरारी पांडेय तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचे। यहां से दोनों घायल बच्चियों को ट्रामा सेंटर बीएचयू के लिए रेफर करवा दिया। घायल बच्चियों के परिजनों की आर्थिक हालत खराब देख सीओ त्रिपुरारी पांडेय ने पुलिस के एक जवान को अपना एटीएम कार्ड देकर साथ लगा दिया।

ट्रामा पहुंचने के बाद अस्‍पताल में दोनों बच्चियों के इलाज के लिए 10 हजार रुपए जमा कराने को कहा गया। दोनों बच्चियों के परिजनों के पास इतना पैसा नहीं था, लिहाजा डाक्‍टरों ने उन्‍हें कहीं और इलाज के लिए ले जाने को कहा। साथ गए सिपाही ने जब इसकी जानकारी क्षेत्राधिकारी त्रिपुरारी पांडेय को दी तो उन्‍होंने तत्‍काल सिपाही को निर्देश दिया कि उनके एटीएम कार्ड से दस हजार निकालकर तत्‍काल जमा कराए।

साथ ही उन्‍होंने यह भी निर्देश दिया कि जितने पैसे की जरूरत हो, उतने पैसे इलाज के लिए निकाल लो। बच्चियों के इलाज में दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए। सीओ त्रिपुरारी पांडेय के पैसे ने दोनों बच्चियों को नया जीवन प्रदान किया है। अंतिमा के जबड़े का ऑपरेशन करने के बाद उसे आईसीयू निकाल कर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं दूसरी बच्‍ची भी अब खतरे से बाहर है।

दरअसल, यह कोई पहली घटना नहीं है और उम्‍मीद है कि आखिरी भी नहीं होगी जब त्रिपुरारी पांडेय का मानवीय चेहरा सामने आया है। इसके पहले चकिया सीओ रहने के दौरान उन्‍होंने मलिन बस्‍ती के तमाम उन बच्‍चों को अपने तनख्‍वाह के पैसे से किताब, कॉपी, ड्रेस दिलाकर स्‍कूल भेजवाया था, जो कहीं पढ़ने नहीं जाते थे। श्री पांडेय पुलिसिंग का चेहरा मानवीय बनाने में जुटे हुए हैं।

त्रिपुरारी पांडेय सकलडीहा तहसील में कई ऐसे पुराने मामले आपसी बातचीत से सुलझा डाले हैं, जो लंबे समय तक पुलिस के लिए परेशानी का सबब बने हुए थे। थोड़ी संवाद और थोड़ी समझाइस के साथ लोगों की मदद करने को तत्‍पर त्रिपुरारी पांडेय क्षेत्र की जनता में भी खासे लोकप्रिय हैं। उनकी लोकप्रियता का ही परिणाम है कि कई पुराने विवाद उनके समझाने से खत्‍म हो चुके हैं।