संतों के विरोध के बाद टली सरयू तट पर मुस्लिमों की वजू

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मनोज श्रीवास्तव

अयोध्या। सरयू तट पर वजू कर नमाज पढ़ने की घोषणा करने वाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसांगिक संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने संतों की नाराजगी के बाद कार्यक्रम परिवर्तित कर लिया। संघ प्रचारक व रमुमं के संयोजक इंद्रेश कुमार ने घोषणा के बाद भी कार्यक्रम से दूरी बना लिया था। प्रदेश संयोजक मेहरजध्वज के नेतृत्व में मुसलमानों ने अयोध्या के सरयूटत पर बिना वजू किये नहू की मजार पर कुरान की आयतें पढ़ी।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण एवं धर्मार्थकार्य मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कहा कि जो व्यक्ति धर्म के बारे में ज्ञान नहीं रखता वह अपनी दुकान चलाने के लिए दूसरे धर्मों की आलोचना करता है। धर्म से बड़ा एक धर्म है वह राष्ट्रधर्म है। सभी धर्मों का मार्ग एक ही है, जो लोग समाज में अमन-चयन नहीं चाहते वही दूसरे धर्म में दोष दर्शन करते हैं। हर पवित्र कार्य को करने में बाधाएं आती हैं।

जिस अयोध्या में हम बैठे हैं यहा पर जन्में भगवान राम को रावण को मारने के लिए 14 साल वनवास काटना पड़ा। मुझे जब यह विभाग मिला तो लोगों को बहुत आपत्ति हुई। पहली बार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एक हिन्दू को मिला है।

एक साल में 40 इंटर कॉलेज खोला, एक हजार मुस्लिम लड़कियों की शादी कराने जा रहा है अल्पसंख्यक विभाग, तीन तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को बिना सरकार से सहायता लिए पेंशन शुरू करेंगे। मदरसे के शिक्षकों को एक सप्ताह में बकाया वेतन देगी सरकार। जिस मिट्टी में हमने जन्म लिया है उस मिट्टी के लिए यदि हम वफादार नहीं हुए तो किसी धर्म के लिए वफादार नहीं हो सकते।

इस कार्यक्रम का स्थानीय संत यह तर्क देकर विरोध कर रहे थे। हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत संराजू दस कि जो स्थान और पूजा पद्ति जिस धर्म के लिए चिन्हित किये गए हैं वही और वैसे होना चाहिए। क्या शांति स्थापना के लिए मुसलमान हमको मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करने देगा।

इस कार्यक्रम से पहले ही भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने खुद को अलग कर लिया था। बुधवार को दोपहर को सामना से बात-चीत में विहिप और संघ के प्रचारकों ने भी इस प्रकार के कार्यक्रम से अनभिज्ञता जताई थी।manoj

वरिष्‍ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.