यह खंडहर नहीं महिला अस्‍पताल है, इसी जिले से आते हैं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री     

अरविंद कुमार चौधरी 

: डफरिन में पसरा रहता है अंधेरा : इलाहाबाद :  जिला महिला चिकित्सालय  (डफरिन) जनपद के नखसा कोना में स्थित है। यहाँ पर प्रतिदिन सैकड़ों महिला मरीज इलाज के लिए आती हैं, जिनमें से बहुत से मरीजों को प्रसव के लिए यहाँ भर्ती भी होना पड़ता है। जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले अन्य सरकारी चिकित्सालयों से भी महिला मरीजों को प्रसव इत्‍यादि के इलाज हेत यहाँ रेफर किया जाता है । मगर इस चिकित्सालय के हालात अंदर से कैसे होंगे, इसका अंदाजा  चिकित्सालय के मुख्य प्रवेश द्वार से लगाया जा सकता है।

इसको देखकर लगता है कि  शायद ही चिकित्सालय की यह इमारत प्रयोग में हो। अगर रात में देखें तो हालात ओर भी खराब नजर आते हैं। जब पूरा नखास कोना बिजली की रोशनी से जगमगाता रहता है, डफरिन चिकित्सालय की इमारत पर मामूली सा प्रकाश नजर आता है। रात में तो मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर जाना ही एक चुनौती नजर आती है। ऐसा लगता है जैसे किसी डरावने खंडहर में जा रहे हों।

ऐसी स्थिति में मरीजों को असुविधा तो होती ही है, असुरक्षा का भाव भी बना रहता है। मरीजों के साथ तीमारदारों को भी  काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। यहाँ पर आगंतुकों से कोई पूछताछ का प्रावधान भी नहीं है, जो चाहे वह पूर्ण चिकित्सालय परिसर में जहाँ चाहे वहां घूम आता है। ऐसा भी नहीं है कि कोई चौकीदार नहीं हैं। यहाँ पर चौकीदार के लिए एक अधूरा सा गार्ड रूम बनाया गया है, जिसमें कई बार चौकीदार देखा जा सकता है। कई बार यहाँ मरीजों के तीमारदार ही बैठे दिखाई देते हैं।

यह चिकित्सालय यहाँ पर फैली अनियमितताओं के कारण तथा मरीजों  को रही असुविधा के कारण मीडिया की सुर्खियों में बना रहता है। इस चिकित्सालय परिसर से दुपहिया वाहन चोरी की वारदातें भी होती रहती हैं। मगर चिकित्सालय प्रशासन तो कुंभकरण की नींद सो रहा है। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता मरीजों को चाहे जो परेशानी हो। खास बात तो यह है कि इलाहाबाद के शहर पश्चिम से विधायक सूबे स्वास्थ मंत्री के पद आसीन हैं, जो दिन प्रति दिन स्वास्थ विभाग की नयी-नयी उपलब्धियाँ गिनाते नहीं थकते। इसके बावजूद डफरिन के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर से अंदर तक प्रकाश की उचित व्यवस्था नहीं होना बहुत कुछ बता जाती है।

इलाहाबाद से अरविंद कुमार चौधरी की रिपोर्ट.