कागजी चमत्कार : यह कस्बा नहीं, मोदीजी का विकसित बनारस है, देखें तस्वीरें

: अधिकारियों और नगर निगम की लापरवाही से काशी की जनता परेशान : वाराणसी। यह तस्‍वीर किसी गांव या कस्‍बे का नहीं है। यह तस्‍वीर देश के सबसे ताकतवर नेता के संसदीय क्षेत्र का है। जी हां, यह बनारस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र। अधिकारियों की लापरवाही, भ्रष्‍टाचार तथा स्‍थानीय नेताओं की लापरवाही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहीं ना कहीं कटघरे में खड़ा करता नजर आ रहा है। मोदी की यात्रा के दौरान दिखने वाली चमक-धमक उनके जाते ही खत्‍म हो जाती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में 13 बार, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 29 बार दौरे के बावजूद बनारस की तस्‍वीर बदलती नजर नहीं आ रही है। बड़ी गाडि़यों को ध्‍यान में रखकर पुल-फ्लाइओवर भले ही बनवाए जा रहे हों, लेकिन बनारस के मोहल्‍लों में जाने वाली सड़कें बदहाल हैं। जिधर मोदी-योगी को नहीं जाना है, वहां कुछ बदलता नहीं दिखा रहा है।

मोदी-योगी के आने-जाने के बावजूद शहर में गड्ढायुक्त सड़कें, बजबजाती नालियां, ओवरफ्लो कर रहे सीवर आपका हर तरफ स्‍वागत करते मिल जाएंगे।  जाम से जूझती ज़िन्दगी यहां की शोभा बढ़ाते हैं। जिस दिन जाम न लगे शहर वाले परेशान हो उठते हैं!  हर तरफ गंदगी, कचरे का अंबार न दिखे तो काशीवासी हताश-निराश होने लगते हैं! दरअसल, ऐसा बनारस के अधिकारी और जिम्‍मेदार मानते हैं शायद!

बुनियादी सुविधाओं के ध्‍वस्‍त हो जाने के कारण काशी अब विकास का नाम पर बस कराह रही है। बनारस कोटे के मंत्री इन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दिये होते तो शायद पीएम और सीएम को काशी का रिकार्ड दौरा नहीं करना पड़ता। नगर निगम अपनी जिम्‍मेदारी निभाने में बुरी तरफ फेल है, जबकि निगम पर लंबे अर्से से भाजपा का ही कब्‍जा है। क्‍या नगर निगम के जिम्‍मेदारों की पीएम-सीएम से कोई खुन्‍नस है, जो वे सुधरने को तैयार नहीं दिखते?

विकास योजनाओं को परखने के लिए जब भी सीएम काशी आये हैं, उनको यहां के कलाकार प्रजाति के अधिकारियों ने अपनी कलात्मकता शैली में विकास कार्य की प्रगति रिपोर्ट दिखाकर विदा कर देते हैं। अधिकारियों की कार्यशैली देखकर यह नहीं लगता कि यह वही अधिकारी हैं, जो कभी कल्याण सिंह और मायावती जैसे मुख्यमंत्री के आने का नाम सुनते ही व्यवस्थित होकर जनता के कार्यों को अंजाम देते थे। यह मुख्यमंत्री प्रगति रिपोर्ट नहीं बल्कि फाइनल रिपोर्ट ही देखना पसंद करते थे।

आश्चर्य है कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री की हैसियत से अपने कार्यकाल के मात्र एक वर्ष में 29 बार काशी का दौरा किया है तो उसका श्रेय श्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं से काशी जूझ रही है। राहत नहीं मिलना सरकार की दावो की पोल जरूर खोल रही है। वाराणसी के लहरतारा रेलवे गेट नंबर-4 से बौलिया जीटी रोड की नारकीय सड़क बनारस के विकास की असली तस्‍वीर दिखाती है। हल्‍की बारिश में यहां आवागमन दुरुह हो जाता है।

इनपुट : पत्रकार द्वय हरेंद्र शुक्‍ला एवं अश्‍वनी शर्मा