सहायक नदियों को साफ किए बिना हो रही गंगा की सफाई, ये नाला नहीं नदी है

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काली नदी में गंदगी भरे बोरे को फेंकता बुलंदशहर का सफाई कर्मचारी

अरविंद कुमार चौधरी

: गंदे नाले में तब्‍दील हो चुकी है काली नदी : इलाहाबाद : “काली नदी” नाम सुनकर ही मन में एक छवि बन जाती है कि जरूर इस नदी का जल काला होगा, मगर ऐसा अतीत में ऐसा नहीं था। परंतु अब यह सत्य हो चला है कि काली नदी का जल भी पूर्णतः काला हो चुका है, जैसे मानो किसी ने इस नदी के जल में काला रंग घोल दिया हो। जहाँ इस नंदी का उद्गम मुजफ्फरनगर जिले में है, वहाँ इस नदी को ‘नागन’  के नाम से भी जाना जाता है। 

मुजफ्फरनगर शहर में प्रवेश करने से पहले तक काली नदी का जल बहुत साफ है, मगर जैसे ही यह नदी मुजफ्फरनगर शहर में प्रवेश करती है तो शहर की तमाम गंदगी नालों के जरिए इस नदी में गिरती है, जिस कारण यह दूषित होना शुरू हो जाती है। इतना ही नहीं मुजफ्फरनगर के औद्योगिक इकाइयों का दूषित जल भी इसी नदी में गिरता है, जिस कारण  मुजफ्फरनगर से ही इस नदी के जल का रंग काला होना शुरू हो जाता है।

जैसे-जैसे काली नदी मेरठ की गंदगी को खुद में समेटती हुई बुलंदशहर में प्रवेश करती है तो यहाँ तक नदी का जल बिल्‍कुल काला हो जाता है। बुलंदशहर में काली नदी का स्वरूप एक गंदे नाले के बराबर रह जाता है। और जो थोड़ा बहुत कमी रह जाती है वह बुलंदशहर में पूरी हो जाती है। यहाँ भी शहर के सभी गंदे नाले इस नदी के जल को दूषित करने में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं।

ऐसा नहीं है कि इस नदी का कोई वजूद नहीं हैं। इस नदी के किनारे खेती भी होती, जिसमें सब्जियों की फसल मुख्य होती है, मगर नदी के दूषित जल से सींचे जाने के कारण यह सब्जियाँ भी बीमारी फैलाने का ही काम करती हैं। एक स्‍वच्‍छ नदी, जिस जिले से चलती है उसी जिले में वह दूषित होना शुरू हो जाती है। मगर नमामि गंगे जैसे बड़ी योजनाओं के अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर नहीं जाता, जबकि काली नदी गंगा की मुख्य सहायक नदियों में से एक हैं।

काली नदी मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा तथा फर्रुखाबाद जिलों में होकर बहती हुई  कुल  460 किमी का सफर तय कर काली नदी कन्नौज से कुछ पहले ही गंगा में मिल जाती है। मगर इसकी सफाई पर शासन-प्रशासन  किसी का ध्यान नहीं है, सब आँखें बंद कर नमामि गंगे परियोजना की हवा निकालने में मस्त हैं।arvind

अरविंद कुमार चौधरी की रिपोर्ट. अरविंद युवा एवं जुझारू पत्रकार हैं. कई संस्‍थानों में सक्रिय रहे हैं.