योगी मुख्यमंत्री के साथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी है

मुझे ताज्जुब होता है, अगर गाय एवं बैल में फर्क न जानने वाले गोसंरक्षण पर सवाल उठाते हैं। वैसे भी योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री होने के साथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। पीठ का नाम ही गोसंरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। ऐसे में गोसंरक्षण के बाबत उनको प्रियंका वाड्रा के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं।

यह बातें उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के एक ट्वीट के जवाब में कही।

उन्होंने कहा कि गोसेवा और गोसंरक्षण क्या होता है? यह देखना,सुनना और अनुभव करना है तो प्रियंका वाड्रा को एक बार गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में जरूर जाना चाहिए।

सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि सिर्फ बयान देने से कोई गोभक्त नहीं बन जाता। यह जीवन में उतारने की बात है। योगीजी ने इसे जीवन में उतारा है। गोरखपुर में मठ में रहने के दौरान उनकी दिनचर्या की शुरुआत ही मंदिर की गोशाला में गोसेवा से होती है। मुख्यमंत्री बनने कर बाद उन्होंने अपने पद के अनुरूप इसे विस्तार दिया है। यह हर कोई जानता है। आप कोअगर यह नहीं दिखता तो यह आपके नजरिए का दोष है। और यह लाइलाज है।